By अभिनय आकाश | Sep 24, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया। उन पर नगीना के सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में कथित टिप्पणी करने के लिए SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि भारती के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध प्रथम दृष्टया बनते हैं और ऐसी स्थितियों में अग्रिम ज़मानत देने पर कानूनी रोक है। एक्ट की धारा 3(1)(r) सार्वजनिक रूप से SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को अपमानित करने के इरादे से जानबूझकर अपमानित या डराने-धमकाने से संबंधित है, जबकि धारा 3(1)(s) SC/ST समुदाय के किसी सदस्य को जातिसूचक नाम से गाली देने से संबंधित है। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब वह नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में भारती के खिलाफ दर्ज मामले में उनकी गिरफ्तारी से पहले ज़मानत (एंटीसिपेटरी बेल) की अर्ज़ी पर विचार कर रहा था। कोर्ट ने आरोपों और उसके सामने पेश किए गए सबूतों की जांच करते हुए पाया कि दो प्रावधानों के तहत अपराध के तत्व प्रथम दृष्टया (prima facie) मौजूद थे, जिससे गिरफ्तारी से पहले ज़मानत पर कानूनी रोक लागू होती है।