By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 07, 2026
नयी दिल्ली, सात सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को हिंदुत्व समर्थक ‘इन्फ्लुएंसर’ स्वतंत्र भारद्वाज की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग छात्रा के पिता पर कथित हमले के मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि भारद्वाज को सुनवाई अदालत के न्यायिक आदेश के तहत हिरासत में भेजा गया है और वह संबंधित अदालत के समक्ष अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दे सकता है। भारद्वाज के वकील ने दलील दी कि एक दिन की हिरासत भी गैर-कानूनी है क्योंकि कानून की नज़र में प्राथमिकी का कोई अस्तित्व ही नहीं है।
सोमवार को उसे फिर से विशेष न्यायाधीश के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश किया गया जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के वकील ने दलील दी, ‘‘वह न्यायिक आदेश के तहत हिरासत में है, ऐसे में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका या अवैध हिरासत का सवाल कहां उठता है। जब कोई कानूनी आदेश मौजूद है तो उसे संबंधित अदालत के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।’’ संसद मार्ग थाने के प्रभारी से मिले निर्देशों के आधार पर पुलिस के वकील ने कहा कि इस प्राथमिकी को उच्चतम न्यायालय ने रद्द नहीं किया है।
शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी में भारद्वाज के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान भी जोड़े गए हैं। अदालत ने कहा कि भारद्वाज के वकील ने दलील दी है कि प्राथमिकी को उच्चतम न्यायालय ने रद्द कर दिया है, लेकिन याचिका में इस आधार का जिक्र नहीं किया गया। पीठ ने कहा, ‘‘आपने याचिका में इस आधार का जिक्र नहीं किया।
अगर हम याचिका पर नोटिस भी जारी करते हैं तो राज्य सरकार क्या जवाब दाखिल करेगी?’’ पीठ ने यह भी कहा कि ‘‘हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में इस तरह का अनुरोध कैसे किया जा रहा है।’’ भारद्वाज के पिता रणधीर कुमार झा की ओर से दायर याचिका का सोमवार सुबह तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया। भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई हमले के मामले में भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कॉजपा द्वारा संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किए जाने के कुछ घंटे बाद हुई।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कॉजपा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता संजय कुमार पर कथित हमले को लेकर भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी के प्रावधानों को जोड़ा है। उसके खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम का मामला भी दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद पांच सितंबर को भारद्वाज को यहां एक सत्र न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया, जिन्होंने आरोपी से एक दिन की हिरासत में पूछताछ की दिल्ली पुलिस की अर्जी को स्वीकार कर लिया था।
पुलिस की ओर से यह कार्रवाई एक साक्षात्कार पर जनाक्रोश के बाद की गई जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि उसने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता का ‘‘सिर फोड़ दिया था’’ और अपने राजनीतिक रसूख के कारण गिरफ्तारी से बच गया। भारद्वाज ने साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैंने सिर फोड़ दिया था...क्या आपको पता है कि इस अपराध में कौन-सी धारा लगती है? धारा 307।
उसे 60 टांके लगे थे।’’ छात्रा ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें प्रसारित की गईं।