Delhi High Court ने Central Secretariat Club की मान्यता रद्द करने पर केंद्र से मांगा जवाब

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 13, 2026

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय सचिवालय क्लब की मान्यता रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार का रुख जानना चाहा। पहले ‘तालकटोरा क्लब’ के नाम से जाने जाने वाले इस क्लब ने ‘संपदा अधिकारी’ के उस बेदखली आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें उसे ‘प्रेसिडेंट्स एस्टेट’ में अपनी मौजूदा जगह को तुरंत खाली करने के लिए कहा गया था। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

याचिकाकर्ता ने कहा कि कामकाज संभालने वाली तदर्थ समिति के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितताओं के बारे में उनकी शिकायतों पर सुधारात्मक कार्रवाई करने के बजाय, अधिकारियों ने पहले बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए फरवरी में मान्यता रद्द कर दी। उच्च न्यायालय के दखल के बाद, याचिकाकर्ता की सुनवाई हुई और 14 जुलाई को मान्यता रद्द करने का नया आदेश जारी किया गया। याचिका में यह तर्क दिया गया कि 14 जुलाई का मान्यता रद्द करने का आदेश और 17 जुलाई का बेदखली का आदेश “साफ तौर पर मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक था, और यह प्रशासनिक शक्तियों का बेशर्मी भरा और मनमाना इस्तेमाल था।” इसमें कहा गया, “प्रतिवादी अपनी ही प्रशासनिक नाकामियों और अपनी तदर्थ समिति की गलत हरकतों का इस्तेमाल करके एक ऐतिहासिक संस्थान को जबरदस्ती खत्म करने और उससे बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं; यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।” याचिका में आरोप लगाया गया है कि बेदखली का आदेश मनमाने ढंग से 107 साल पुरानी ऐतिहासिक संस्था—जिसे स्थायी कब्जा दिया गया था—को सिर्फ आवंटन रद्द करने की गैर-कानूनी कार्रवाई के आधार पर “अनधिकृत कब्जेदार” मानता है।

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