By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 07, 2026
नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार के अस्पतालों में करोड़ों रुपये के उपकरणों के इस्तेमाल नहीं होने पर चिंता जताई और इस समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी. एस. अरोड़ा की पीठ ने कहा कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी जैसे अस्पतालों में विश्व की प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण उपकरणों का उपयोग बड़ी संख्या में नहीं किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि उसे प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इन उपकरणों के इस्तेमाल नहीं होने के कारणों में तकनीकी कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ सहायक उपकरणों और मुख्य मशीनों का उपलब्ध नहीं होना शामिल है।
यह स्पष्ट नहीं है कि भारी निवेश के बाद इन उपकरणों को बेकार पड़े रहने की अनुमति क्यों दी जा रही है और अस्पताल या सेवा विभाग ने आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए हैं।’’ अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को इस मुद्दे पर अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों और सेवा विभाग के सचिव के साथ बैठक करने तथा रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अधिकारी प्रत्येक अस्पताल की स्थिति का विश्लेषण करेंगे और जहां जरूरत हो वहां कर्मचारियों की व्यवस्था, उपयोग में नहीं आ रहे उपकरणों का पुन: आवंटन, सहायक उपकरणों तथा मुख्य मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में कदम उठाने पर विचार करेंगे। अदालत ने आदेश दिया, ‘‘यह बैठक 17 अगस्त को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में होगी।
स्वास्थ्य सचिव सभी पहलुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करेंगे।’’ इससे पहले तीन जुलाई को अदालत ने दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी अस्पतालों को खरीदी गई, लेकिन इस्तेमाल में नहीं लाई जा रही सभी मशीनों का ऑडिट करने और उसकी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत यह सुनवाई 2017 में शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले में कर रही थी। यह मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में गंभीर देखभाल से जुड़ी सुविधाओं की कथित कमी को लेकर शुरू किया गया था।
इस मामले में अधिवक्ता अशोक अग्रवाल को अदालत की सहायता के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया गया है।