Delhi Malviya Nagar Hotel Fire | लाइसेंसिंग और निगरानी में बड़ी लापरवाही, 21 मौतों के बाद जांच के घेरे में सरकारी एजेंसियां

By रेनू तिवारी | Jun 10, 2026

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके मालवीय नगर में स्थित एक गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग, जिसमें 21 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, की जांच अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। शुरुआती दौर में जहां सारा ध्यान होटल के मालिकों और ग्राउंड स्टाफ की लापरवाही पर था, वहीं अब इस मामले की सुई दिल्ली की लाइसेंसिंग और रेगुलेटरी (नियमन) व्यवस्था में फैली गहरी खामियों की ओर घूम गई है। तमाम नई जानकारियों ने दिल्ली प्रशासन के सामने एक बड़ा और तीखा सवाल खड़ा कर दिया है: जब सुरक्षा मानकों और कागजी दस्तावेजों की बुनियादी शर्तों का सरेआम उल्लंघन हो रहा था, तो इस मौत के कुएं को कमर्शियल ऑपरेशन की इजाजत किसने और कैसे दी? 3 जून को 'फ्लोरिश स्टे B&B' में लगी आग हाल के वर्षों में राजधानी में होटल में लगी सबसे खतरनाक आग की घटनाओं में से एक थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, होटल के अकाउंटेंट जय मिश्रा ने पुलिस को बताया कि मालिक लवकेश बजाज के कहने पर उन्होंने बेड-एंड-ब्रेकफास्ट लाइसेंस लेने के लिए अपने पर्सनल डॉक्यूमेंट्स दिए थे। बताया जाता है कि उन्होंने कहा कि एप्लीकेशन प्रोसेस खुद मालिक ने ही संभाला था। उन्हें कथित तौर पर लगभग 35,000 रुपये की मासिक सैलरी मिलती थी।

अब सवाल यह उठता है कि किसी कर्मचारी के नाम पर लाइसेंस कैसे मंज़ूर किया जा सकता था, जबकि प्रॉपर्टी और बिज़नेस कथित तौर पर किसी और के कंट्रोल में थे। अधिकारी अब यह देख रहे हैं कि लाइसेंस देने से पहले ठीक से वेरिफिकेशन किया गया था या नहीं।

रेगुलेटरी जांच पर सवाल

नई जानकारियों ने ऐसे संस्थानों को मंज़ूरी देने और उनकी निगरानी करने वाली अथॉरिटीज़ पर भी ध्यान खींचा है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या मंज़ूरी की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी थी और क्या ज़रूरी जांच को नज़रअंदाज़ किया गया था। अगर ओनरशिप की जानकारी, ऑपरेशनल कंट्रोल और डॉक्यूमेंटेशन मेल नहीं खाते थे, तो सवाल उठ रहे हैं कि इन कमियों को पहले क्यों नहीं पकड़ा गया। जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या समय-समय पर इंस्पेक्शन और नियमों के पालन की जांच की गई थी या नहीं।

पुलिस को पता चला है कि मिश्रा सिर्फ़ अकाउंट्स ही नहीं संभाल रहे थे, बल्कि होटल के रोज़मर्रा के कामकाज में भी गहराई से शामिल थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि वह स्टाफ की देखरेख करते थे, गेस्ट रिकॉर्ड्स मैनेज करते थे, एडमिनिस्ट्रेटिव काम देखते थे और लाइसेंस से जुड़े डॉक्यूमेंटेशन का काम संभालते थे। उन पर सुरक्षा ज़रूरतों के पालन की निगरानी करने और संस्थान के कामकाज से जुड़े ज़रूरी रिकॉर्ड्स बनाए रखने की ज़िम्मेदारी भी थी।

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रिकॉर्ड्स नष्ट होने के दावे की जांच

पूछताछ के दौरान, मिश्रा ने कथित तौर पर दावा किया कि गेस्ट रजिस्टर, पहचान से जुड़े रिकॉर्ड्स, लाइसेंस के कागज़ात और अन्य डॉक्यूमेंट्स आग में नष्ट हो गए।हालांकि, जांचकर्ता सिर्फ़ इसी स्पष्टीकरण पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। पुलिस अब होटल से जुड़े कागज़ात और रिकॉर्ड फिर से इकट्ठा कर रही है। वे सरकारी विभागों, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और दूसरी एजेंसियों से जानकारी जुटा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या नियमों के उल्लंघन को नज़रअंदाज़ किया गया था।

जांच में मालिक और मैनेजमेंट की आपराधिक ज़िम्मेदारी एक अहम पहलू है, लेकिन सामने आ रही जानकारियों ने रेगुलेटरी सिस्टम (नियमन प्रणाली) में जवाबदेही को लेकर भी बड़ी चिंताएँ पैदा कर दी हैं। अब मुख्य सवाल यह नहीं है कि होटल कौन चला रहा था, बल्कि यह है कि इसे चलने की इजाज़त किसने दी। लाइसेंसिंग की प्रक्रिया में कमियाँ क्यों थीं और सुरक्षा नियमों का पालन ठीक से क्यों नहीं किया गया?

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