By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2026
दिल्ली पुलिस ने एसीपी विवेक भगत द्वारा एक महिला का यौन उत्पीड़न करने का फर्जी वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के आरोप में खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताने वाले 24 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक इंस्टाग्राम पेज चला रहा था जिसपर करीब 24 हजार फोलोअर हैं।
पुलिस के अनुसार, फर्जी वीडियो को इस इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से प्रसारित किया गया था और इसे वास्तविक सीसीटीवी फुटेज के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने एक व्यक्ति को कथित तौर पर एक महिला के साथ यौन रूप से अनुचित आचरण करते हुए दिखाया गया था। अधिकारी ने कहा, सहायक पुलिस आयुक्त विवेक भगत की तस्वीर, नाम और पदनाम को कथित फुटेज के साथ प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया था और उन्हें घटना में शामिल व्यक्ति के तौर पर दिखाया गया।” नयी दिल्ली जिले के साइबर थाने में चार अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 353(1)(सी) (सार्वजनिक शरारत के लिए उकसाने वाले बयान), 336(3) (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 336(4) (किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जालसाजी), 340(2) (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड) और 294 (अश्लील किताबों की बिक्री, आदि) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान इंस्टाग्राम पेज को संचालित करने वाले शख्स की पहचान नदीम अहमद अमीन के रूप में हुई।
अधिकारी ने बताया कि जिस अकाउंट के माध्यम से ‘रील’ प्रसारित की गई थी, वह उसके पास से बरामद मोबाइल फोन पर ‘लॉग इन’ पाया गया, जबकि फर्जी ‘रील’ से जुड़ी सामग्री और एक तस्वीर भी फोन की गैलरी में मिली। गिरफ्तारी के बाद नदीम को अदालत में पेश किया गया और आगे की जांच के लिए पुलिस हिरासत प्राप्त की गई। पुलिस ने कहा कि नदीम ने साकेत के एक मदरसे में पढ़ाई की थी और वह 10वीं कक्षा में फेल हो गया था।
उसके पिता सरकारी शिक्षण संस्थान में उर्दू के शिक्षक थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पुलिस ने कहा कि जांचकर्ता वित्त पोषण के स्रोत की जांच कर रहे हैं, और क्या प्रदर्शन के दौरान उकसाने और अराजकता फैलाने के लिए एक बड़ी पूर्व-योजनाबद्ध साजिश रची गई थी, इसकी भी तहकीकात कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की छवि कथित तौर पर खराब करने और सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाने के लिए कथित झूठे विमर्श बनाने में शामिल अन्य सोशल मीडिया पेज की भी पहचान की जा रही है।
यह मामला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) भगत पर लगाए गए यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बीच आया है।