GST अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म करने की तैयारी, अपराध साबित होने पर ही होगी कार्रवाई

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 06, 2026

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर माल एवं सेवा कर परिषद के समक्ष जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करने का प्रस्ताव ‘करदाता पर भरोसे’ के सिद्धांत पर आधारित है। राज्यों को भी इस शक्ति को समाप्त करने का औचित्य नजर आएगा क्योंकि उत्पाद शुल्क को छोड़कर किसी अन्य कर कानून में यह शक्ति कभी नहीं थी। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

बैठक में जीएसटी अनुपालन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों पर विचार किया जाएगा। इसमें जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां खत्म करना भी शामिल है। अपराध को गैर-दंडनीय बनाने की प्रक्रिया के तहत अभियोजन चलाने की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

जीएसटी कानून में ये बदलाव 2027 की शुरुआत में लागू किए जाने की संभावना है। जीएसटी अधिकारी को गिरफ्तारी की शक्ति उत्पाद शुल्क कानून से मिली थी। इसे 2017 में जीएसटी लागू होने के समय इसमें समाहित कर दिया गया था।

मूल्य वर्धित कर (वैट), सेवा कर या अन्य कर कानूनों के तहत कर अधिकारियों के पास गिरफ्तारी की शक्ति नहीं थी। जब जीएसटी लागू किया गया था, तब फर्जी बिल जारी करने के मामलों में गिरफ्तारी की शक्ति कुछ उपलब्ध उपायों में से एक थी। इसका कारण ऐसे मामलों का पता लगाने के साधन सीमित थे और बिलों का मिलान नहीं हो पाता था।

उस समय गड़बड़ियों का पता लगाने की व्यवस्था उतनी दक्ष नहीं थी। ऐसे में रोकथाम के लिए कड़ी कार्रवाई के प्रावधान से करनी पड़ती थी। एक अन्य सूत्र ने कहा, “इसीलिए जीएसटी अधिकारियों को गिरफ्तारी की शक्ति कानून में दी गई थी।

हालांकि, आज बेहतर तकनीकी व्यवस्था से बिलों का मिलान संभव है। गिरफ्तारी से जो सुरक्षा देने का उद्देश्य था, वह अब प्रणाली के जरिये मिल रहा है।” सूत्रों ने कहा कि कर अधिकारी का मुख्य काम कर संग्रह करना होना चाहिए, जबकि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दिया जाना चाहिए। जीएसटी परिषद के समक्ष रखे गए प्रस्ताव में अभियोजन शुरू होने से पहले की गिरफ्तारी को खत्म करने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई कर बकाया है, तो उसे वसूलने का प्रयास होना चाहिए। अगर अपराध हुआ है और अभियोजन शुरू किया गया है, तो अदालत के आदेश के आधार पर गिरफ्तारी की जा सकती है।’’ इन बदलावों से ईमानदार कारोबारियों को जीएसटी अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी की आशंका के बिना अपना काम जारी रखने में मदद मिलेगी। सूत्र ने कहा, “प्रस्ताव कर विभाग के ‘करदाता पर भरोसे’ के सिद्धांत को बताता है।

एक-दो राज्य गिरफ्तारी की शक्ति बरकरार रखना चाहते हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि वे इस प्रस्ताव पर सहमत होंगे।

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