Delhi Police कर्मियों के परिजनों ने Parliament मार्च हिंसा पर अपनी पीड़ा जताई

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 31, 2026

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आह्वान पर 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के चार कर्मियों के परिजनों ने संसद से अपील की कि पुलिसकर्मियों को आईं चोटों और उनके परिवारों की पीड़ा पर भी ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि इस घटना में पुलिस पर लगाए गए अत्याचार के आरोपों की ही ज्यादा चर्चा हो रही है, जबकि हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ क्या हुआ, उस पक्ष को नजरअंदाज कर दिया गया। ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) की पत्नी, एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) की पत्नी तथा दो घायल पुलिस अधिकारियों के बच्चों ने उन पलों को याद किया, जब वे अस्पतालों से आने वाले फोन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, खून से सनी वर्दी देख रहे थे और बाद में सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं देखीं, जिसमें ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों की पीड़ा और चोटों की अनदेखी की गई।

वह बैरिकेड के पास अग्रिम पंक्ति में थे, जहां भारी भीड़ थी। जब भी वह ड्यूटी के बाद घर लौटते थे, तो वह हमें बताते थे कि अब यह छात्रों का विरोध प्रदर्शन नहीं लग रहा है और इसमें कई असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर मंच के पास भीड़ ने उनके पिता को खींच लिया, उनके साथ लगभग लिंचिंग (पीट पीट कर मार डालना) जैसी घटना हुई और वह करीब चार घंटे तक आरएमएल अस्पताल में बेहोश रहे।

उन्होंने कहा कि रात करीब 10 बजे उनके सहकर्मी उन्हें घर लेकर आए। उनकी वर्दी पूरी तरह से खून से सनी हुई थी। कुंजल ने कहा, उन्हें उस हालत में देखना हमारे लिए बेहद दर्दनाक था।

कुंजल ने कहा कि इसके बाद जो हुआ, वह उतना ही दुखद था। उन्होंने कहा, जब मैंने सोशल मीडिया खोला, तो मेरे पिता को पहले ही अपराधी घोषित कर दिया गया था। अगले दिन मुझे पता चला कि जिन लोगों ने उन पर हमला किया था, वे उच्चतम न्यायालय का रुख कर रहे हैं और पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर रहे हैं।

मुझे लगा कि मुझे भी अपने पिता के लिए न्याय मांगना चाहिए। नागरिक के रूप में हमारे पास भी समान अधिकार हैं, और हमें उम्मीद है कि न्याय होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के परिवारों ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी चिंताओं को रखने के लिए वकीलों से संपर्क किया है।

वहीं, अपने पति के घायल होकर घर लौटने की घटना को याद करते हुए एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने कहा कि वह रात उनके और उनकी दो वर्षीय बेटी के लिए ‘‘आघात पहुंचाने’’ वाली थी। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने भीड़ से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों की ओर से बोतलें, पत्थर, चप्पलें और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। उपनीत कौर ने कहा, “हर वर्दी के पीछे केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि उसकी पत्नी, बच्चे, माता-पिता और पूरा परिवार होता है।

हम चाहते हैं कि लोग इस बात को समझें।” उन्होंने कहा कि हिंसा के बाद पुलिसकर्मियों के परिवार एक-दूसरे के साथ जुड़े रहे और उन्होंने उन कठिन परिस्थितियों को साझा किया, जिनसे उन्हें गुजरना पड़ा। इस दौरान ‘स्लाइड शो’ भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें घायल पुलिसकर्मियों की तस्वीरें और आंकड़े दिखाए गए। परिवारों के अनुसार, इनसे हिंसा की गंभीरता का पता चलता है।

प्रस्तुति में दावा किया गया कि हिंसा में 250 से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि 110 से ज़्यादा बैरिकेड, 300 बॉडी प्रोटेक्टर, 350 हेलमेट, 20 लाउडहेलर, 10 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर और एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर क्षतिग्रस्त हो गए। साथ ही, 25 से ज़्यादा सरकारी गाड़ियों और निजी संपत्ति में तोड़-फोड़ की गई। एक एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि 20 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे उनके पति ने फोन पर बताया कि भीड़ बहुत ज़्यादा है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, कुछ घंटों बाद, उन्हें एक और फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनके पति का इलाज लोक नायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में किया जा रहा है। सीमा ने कहा, जब मैंने उनसे बात की, तो उन्होंने बताया कि भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, गमले, चप्पल और जूते फेंके। इसके बाद उनके फोन की बैटरी खत्म हो गई और मैं बहुत डर गई थी।

उन्होंने बताया कि उनके पति रात करीब 11 बजे घर लौटे और उनका सुरक्षा हेलमेट टूटा हुआ था। सीमा ने कहा, अगर हेलमेट टूटने के बाद उनके सिर पर एक और पत्थर लगा होता, तो शायद वह बच नहीं पाते। लेकिन कई दिनों से सिर्फ एक ही बात पर चर्चा हो रही है कि पुलिस ने छात्रों के साथ बर्बरता की।

यह सिर्फ एक पहलू है। हम चाहते हैं कि संसद में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के साथ जो हुआ, उस पर भी चर्चा हो। प्रेस वार्ता के दौरान पुलिसकर्मियों के परिवारों ने कहा कि वे छात्रों को दोष नहीं दे रहे हैं, लेकिन आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों ने भीड़ में घुसकर हिंसा भड़काई।

घटना में घायल हुए एक एसीपी के बेटे लक्ष्य सिंह ने कहा कि हिंसा के दौरान सिर में चोट लगने के बाद जब उन्होंने पहली बार अपने पिता को देखा तो उन्हें सदमा लगा।

प्रमुख खबरें

US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप

1 अगस्त को Tamil Nadu जाएंगे Rahul Gandhi पर मुख्यमंत्री विजय से नहीं होगी मुलाकात

Ben Stokes की वापसी पर सस्पेंस बरकरार, Rob Key बोले- Ashes 2027 से पहले मुमकिन है धाकड़ ऑलराउंडर का कमबैक

Bombay High Court ने कचरा फैलाने की प्रवृत्ति पर जताई नाराजगी, नगर निकाय को दिए निर्देश