CEC Gyanesh Kumar विरोध प्रदर्शन, Delhi Police ने 22 FIR में लगाई BNS धारा 3(5)

By अभिनय आकाश | Oct 09, 2026

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ सात दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के दौरान, कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने कुल 27 FIR दर्ज कीं। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चार खास धाराओं का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया, जिसमें 'संयुक्त आपराधिक दायित्व' को मुख्य आरोप बनाया गया। बैरिकेड्स लगाए गए, जंतर-मंतर और पार्लियामेंट स्ट्रीट के आस-पास की सड़कें बंद कर दी गईं और निषेधाज्ञा लागू की गई। डेटा से पता चलता है कि सरकारी आदेशों को न मानने, सरकारी काम में रुकावट डालने और सरकारी कर्मचारियों का सक्रिय रूप से विरोध करने वालों के खिलाफ़ ठोस कार्रवाई की गई। दिल्ली पुलिस ने नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अहम धाराओं का इस्तेमाल करते हुए 27 अलग-अलग FIR दर्ज कीं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ 27 FIR दर्ज करने के लिए पुलिस ने चार चरणों वाली कानूनी रणनीति अपनाई, जिसमें 'संयुक्त जवाबदेही' (joint liability) वाली धारा का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया गया।

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जिन मामलों में टकराव हिंसक हो गया, वहां पुलिस ने 17 FIR में BNS की धारा 132 भी जोड़ी। इस धारा में किसी सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला करने या आपराधिक बल का इस्तेमाल करने जैसे अपराध शामिल हैं; बैरिकेड्स पर सीधे शारीरिक विरोध की स्थिति में यह एक गंभीर आपराधिक आरोप जोड़ता है। BNS के आरोपों के अलावा, 9 FIR में PDPP/DPDP एक्ट (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उसे खराब करने से रोकने वाला कानून) की धारा 3 भी लगाई गई। मुख्य चार धाराओं के अलावा, कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने अलग-अलग घटनाओं की गंभीरता के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई अन्य सख्त धाराएं भी लगाईं: BNS धारा 121/121(1): किसी सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए जान-बूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना; BNS धारा 115(2): जान-बूझकर चोट पहुंचाना; BNS धारा 126(2): किसी व्यक्ति को गलत तरीके से रोकना; BNS धारा 127(2): गलत तरीके से कैद करना या किसी व्यक्ति की आवाजाही पर गैर-कानूनी रोक लगाना; BNS धारा 74/75: महिलाओं के खिलाफ हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल, जिसमें यौन उत्पीड़न से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं; और BNS धारा 118(1): खतरनाक हथियारों या साधनों का इस्तेमाल करके जान-बूझकर चोट पहुंचाना।

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