By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 13, 2026
(कुणाल दत्त) नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर दशकों तक जंतर-मंतर रोड दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की आवाज का प्रमुख केंद्र रही और जोरदार प्रदर्शनों से लेकर शांतिपूर्ण आंदोलनों तक का पर्याय बन गई। इस सड़क का नाम 18वीं सदी की खगोलीय वेधशाला के नाम पर पड़ा, जिसका इतिहास भी बेहद दिलचस्प है। भारत में प्रदर्शनों के प्रमुख स्थलों में गिनी जाने वाली जंतर-मंतर रोड मध्य दिल्ली के एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक वेधशाला तक जाती है।
इंडिया गेट के लॉन के पास स्थित बोट क्लब में प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाए जाने के बाद 1993 तक जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के वैकल्पिक स्थल के रूप में उभर चुका था। इस सड़क और यहां स्थित प्रदर्शन स्थल का नाम खगोलीय वेधशाला के नाम पर पड़ा, जिसका निर्माण जयपुर के सवाई महाराजा जय सिंह द्वितीय ने 1724 में कराया था। तीन शताब्दियों से अधिक समय से यह वेधशाला भारत की स्थापत्य विरासत और इंजीनियरिंग कौशल की मिसाल के रूप में खड़ी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, इसके विशाल परिसर में कई प्रमुख खगोलीय यंत्र हैं। इनमें सम्राट यंत्र शामिल है, जो पृथ्वी की धुरी के अनुरूप बनाए गए आधार वाला विशाल त्रिकोणीय धूपघड़ी यंत्र है। जयप्रकाश यंत्र में दो अर्धगोलाकार संरचनाएं हैं, जिनसे सूर्य और तारों की स्थिति का पता लगाया जाता है।
राम यंत्र में दो गोलाकार इमारतें हैं, जिनसे क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर कोण मापे जाते हैं। वहीं, मिश्र यंत्र ऐसा संयुक्त यंत्र है, जो विभिन्न महाद्वीपों में समय बताने और सूर्य की कर्क राशि में प्रवेश की स्थिति का पता लगाने में मदद करता है। एएसआई ने पहले कहा था, ‘‘जयपुर के संस्थापक और खगोल विज्ञान में गहरी रुचि रखने वाले सवाई जय सिंह द्वितीय ने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में इन विशाल यंत्रों को तैयार करने से पहले पूर्वी और पश्चिमी, दोनों खगोलीय प्रणालियों का अध्ययन किया था।
अधिक सटीकता के लिए उन्होंने नाजुक धातुओं के बजाय ठोस चिनाई वाली संरचनाओं को चुना। दिल्ली की वेधशाला ईंटों के मलबे और चूने के पलस्तर से बनी है। समय-समय पर सावधानीपूर्वक इसकी मरम्मत की गई है, लेकिन इसका मूल स्वरूप बरकरार है।’’ वेधशाला की प्रत्येक संरचना भारत की समृद्ध वैज्ञानिक, खगोलीय और गणितीय प्रतिभा की विरासत की गवाही देती है।
दिल्ली का यह ऐतिहासिक स्थल शहर के बीचोंबीच एक विशाल परिसर में स्थित है। इसके एक ओर संसद मार्ग है। सूत्रों ने पहले बताया था कि शनिवार को मध्य दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम के कारण यह इलाका लगभग किले में तब्दील हो गया था और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल आम लोगों के लिए बंद था, लेकिन ऐतिहासिक वेधशाला को ‘‘आधिकारिक तौर’’ पर पर्यटकों के लिए खुला रखा गया था।
इस ऐतिहासिक सड़क पर स्थित प्रमुख इमारतों में सात, जंतर-मंतर रोड का बंगला भी शामिल है। दिल्ली के बीचोंबीच स्थित ब्रिटिश काल का यह आकर्षक बंगला कोई सामान्य पता नहीं है। पहले यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) का मुख्यालय रह चुका है और वर्तमान में यहां एक पुराने ट्रस्ट द्वारा संचालित पुस्तकालय भी है।
जंतर-मंतर रोड पर स्थित दो मंजिला इस इमारत की वास्तुकला विशिष्ट है। पिछले कई दशकों के दौरान इस सड़क पर हुए अनगिनत सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और लंबे धरनों की यह मूक गवाह रही है।