जनजातीय धर्मभक्ति की ज्वाला से बढ़ा दिल्ली का तापमान

By तरुण विजय | May 26, 2026

लाल किले के प्राचीर से भारत वर्ष के कोने कोने से आये लाखों जनजातीय समाज के लोगों ने अपने धर्म, संस्कृति की रक्षा, हेतु जो हुंकार भरी उसकी अनुगूंज वर्षों वर्षों तक कायम रहेगी। सर्वाधिक मंत्रमुग्ध करने वाला प्रभावशाली विचारोत्तेजक सम्बोधन था भारत के गृहमंत्री अमित शाह का जिन्होंने निर्भीक स्पष्टता से भारतीय जनजातीय समाज की धर्मरक्षा, संस्कृतिरक्षा की बात की। वह अभूतपूर्व और असाधारण बात थी और उन्होंने लाखों जनजातीय बंधुओं-बहनों को एक प्रकार से रोमांचित कर दिया। उनके यह शब्द वर्षों तक याद किए जाएंगे कि भगवान बिरसा मुंडा को तो मैंने नहीं देखा लेकिन आज जो यहाँ जनजातीय समाज का सागर उमड़ पड़ा है मैं उन में बिरसा मुंडा के दर्शन कर रहा हूँ और यह जनजातीय सांस्कृतिक समागम बिरसा मुंडा के उलगुलान (परिवर्तन हेतु जन क्रांति) के बाद का पहला समागम है। भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी भी कोई धर्मरक्षा संस्कृतिरक्षा का समागम नहीं हुआ। 

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ऐसा देश ने कभी देखा नहीं और दिल्ली के सद्भावी नागरिकों ने अपने घर के दरवाजे खोल दिए और हर घर में इन जनजातीय भाई-बहनों को रुकवाया गया। उनकी सेवा की, उनको भोजन, पानी दिया उनको स्टेशन से लाए और छोड़ने गए। ऐसा दिल्ली ने कभी दृश्य देखा नहीं। दिल्ली का ह्दय कितना बड़ा है वह इस समागम के आतिथ्य से पता चला। दिल्ली के राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं ने इस जनजातीय बंधू बहनों का इतना सुंदर सत्कार किया कि उसको व्यक्त करना संभव नहीं है।

जो भी जनजातीय समाज छोड़कर ईसाई बनता है, कन्वर्टेड होता है उसको जनजातीय समाज की सूची यानी शेड्यूल ट्राइब सूची से बहार निकल कर मूल जनजातियों को बचाइए क्योंकि धर्मान्तरण करने वाला जनजातीय रह ही नहीं जाता है। जनजाति समाज के वरिष्ठ इंजीनीयर, पद्मश्री से अलंकृत अरुणाचल के प्रसिद्द वैचारिक अग्रणी तिची गुबिन ने कहा कि वहाँ अरुणाचल क्रिस्चियन फोरम है। उसके नेताओं ने  खुले आम सोशल मीडिया पर धमकी दी है कि वे पूरे अरुणाचल को ईसाई लैंड बनाएंगे, क्रिस्चियन लैंड बनाएंगे। गुबिन ने मांग की है कि हमारे धर्म की रक्षा की जाए और जो भी हमारे समाज को छोड़कर ईसाई होता है उसको शिड्यूल ट्राइब की लिस्ट से डीलिस्ट किया जाए।

प्रसिद्द जनजातीय नेता, विचारक एंड राजनीति के धुरंधर गनेश राम भगत ने तो पूरे समागम को एक प्रकार से मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारे रक्त में भगवान राम का रक्त है, हम भगवान राम के वंशज हैं। भगवान राम के लिए हमने रावण का हनन किया था और उस  को परास्त किया था। हम इस कनवर्जन के राक्षस से भी लड़ सकते हैं और इस राक्षस को हम समाप्त करेंगे।  

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के सहयोग से जनजाति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में इस समागम का आयोजन हुआ। यह संगठन विश्व का सबसे बड़ा गैर ईसाई जनजातीय संगठन है। देश भर में वनवासी कल्याण आश्रम के सत्रह हज़ार से अधिक प्रकल्प चलते हैं, जिनमें छात्रावास, आरोग्य केंद्र, विद्यालय, धर्मजागरण मंच, खेलकूद केंद्र, शामिल हैं। इसके कार्यकर्ताओं में आईआईटी के स्नातक, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, जे एनयू, दिल्ली विश्विद्यालय के प्राध्यापक, महिला अधिकार रक्षा संगठनों के प्रमुख, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, अनेक मंत्री, सांसद आदि सब सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके अध्यक्ष राजस्थान के भील जनजाति से सतेंद्र सिंह हैं, जिनका धाराप्रवाह सम्बोधन मुर्दों में भी जान फूंक देता है। इसी प्रकार संगठन के प्रमुख कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों में अतुल जोग, भगवान सहाय, प्रमोद पेठकर, हर्ष चौहान, तेचि गुबिन जैसे अत्यंत श्रेष्ठ विद्वान हैं परन्तु वे कभी भी सामने आते नहीं, शांत निर्विकार भाव से अचीन्हे अनजान रहकर जनजाति रक्षा और विकास के कार्य में लगे रहते हैं। उन्ही की और इंगित करते होते अमित शाह ने अपने सम्बोधन में कहा कि जनजाति समाज का हमारे प्रति इतना विश्वास है कि हाल ही के बंगाल चुनावों में प्रदेश की सोलह में से सोलह जनजातीय सीटें भाजपा ने जीतीं हैं।

लाल किले के जनजातीय समागम में मणिपुर, अरुणाचल, नागालैंड और असम की बहनों ने इतना सुंदर वंदे भारतम गाया की सब चकित रह गए। इस समागम की गूंज आने वाले वर्षों तक केवल गूंजती हे नहीं रहेगी बल्कि इसका असर होगा और भारत सरकार को बाध्य होना पड़ेगा कि वह धर्मान्तरित होने वाले तमाम जनजातीय लोगों को डी लिस्ट करे शिड्यूल ट्राइब से बाहर निकाले। 

इस समागम ने जनजातीय समाज को शक्ति दी है, भक्ति दी है, युक्ति दी है, तत्त्वचिंतन दिया है और पराक्रम का एक भाव जागृत किया है कि हम जनजातीय हैं, हम भारत माता की संतान हैं, हम कभी परास्त नहीं होंगे राष्ट्र के शत्रुओं को, संस्कृति और धर्म के शत्रुओं को हम परास्त करेंगे।

- तरुण विजय

(लेखक पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार हैं) 

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