Delhi High Court में PIL: प्रदर्शनों के लिए बने सख्त SOP, ट्रैफिक जाम रोकने की मांग

By अभिनय आकाश | Oct 13, 2026

एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने और एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की मांग की है। इसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनों के कारण सड़कों पर रुकावट, ट्रैफिक में बाधा और अदालतों व व्यावसायिक इलाकों तक पहुँचने में होने वाली दिक्कतों को रोकना है। जनहित याचिका (PIL) में वकील ऋषभ सक्सेना ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की है कि विरोध-प्रदर्शन कानून के मुताबिक तय जगहों पर ही हों। साथ ही, शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के संवैधानिक अधिकार और लोगों के बिना रुकावट आने-जाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। याचिका में मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत सरकार' और 'अमित साहनी बनाम पुलिस कमिश्नर' मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के उस स्टैंडिंग ऑर्डर को भी लागू करने की मांग की गई है, जिसमें प्रदर्शन करने के लिए शर्तें तय की गई हैं।

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हालाँकि, याचिका में यह भी माना गया है कि सिर्फ़ तस्वीरों से यह पता नहीं चल सकता कि रुकावट कितने समय तक रही, कितनी गाड़ियाँ प्रभावित हुईं या क्या कहीं और ट्रैफ़िक के इंतज़ाम किए गए थे। याचिका में पिछले कुछ वर्षों में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और लंबे समय तक चले धरनों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफ़िक की आवाजाही और बिज़नेस डिस्ट्रिक्ट, सरकारी संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों तक पहुँचने में दिक्कत हो सकती है। इसमें 2023 में पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन और रोज़गार व परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर धरनों सहित कई आंदोलनों का ज़िक्र किया गया है और आरोप लगाया गया है कि लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों और ट्रैफ़िक डायवर्जन से यात्रियों, ऑफ़िस जाने वालों, व्यापारियों, मरीज़ों, इमरजेंसी सेवाओं, ड्राइवरों और दिहाड़ी मज़दूरों पर असर पड़ा है। याचिका में दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर, 2026 के उस आदेश का भी ज़िक्र किया गया है, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया था और रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को वैकल्पिक जगहों के तौर पर तय किया गया था।

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