Health Tips: डिप्रेशन की दवाएं खाने से कई गुना बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का रिस्क, जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

By अनन्या मिश्रा | Jul 05, 2025

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिसाब से पूरी दुनिया में करीब 3.1% लोग एंटी-डिप्रेसेंट की दवाओं का सेवन कर रहे हैं। पूरी दुनिया में करीब 25 करोड़ से अधिक लोग ये दवाएं खा रहे हैं। हाल ही में हुए एक स्टडी में सामने आया कि सडेन कार्डियक अरेस्ट के कारण हो रही मौतों की सीधा कनेक्शन एंटी डिप्रेसेंट गोलियों से है। एक स्टडी के हिसाब से जिन लोगों को कार्डियोवस्कुलर डिजीज है, उनको डिप्रेशन का खतरा अधिक होता है। वहीं जिन लोगों को डिप्रेशन होता है, उनको अचानक से कार्डियक अरेस्ट का खतरा होता है। जो लोग एंटी डिप्रेसेंट दवाएं खा रहे हैं, उनको अचानक से कार्डियक अरेस्ट का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए जानेंगे कि सडेन कार्डियक अरेस्ट क्या होता है और एंटी-डिप्रेसेंट गोलियों से शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है।


बीते कुछ सालों में भारत में मूड में सुधार के लिए और डिप्रेशन में खाई जाने वाली दवाओं की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वहीं मूड बूस्टर और सेरोटॉनिन रिलीज करने वाली दवाएं भी आजकल लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो रही हैं। क्योंकि लोग इनको बेचैनी, तनाव और उदासी से राहत पाने का आसान तरीका मानने लगे हैं।

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सडेन कार्डियक डेथ

सडेन कार्डियक डेथ का मतबल है कि अचानल के दिल का रुक जाना। यानी की एक सामान्य, एक्टिव दिखने वाला व्यक्ति जो हंस रहा था, बात कर रहा था, दौड़ रहा था, उसका अचानक से दिन धड़कना बंद हो जाता है। मेडिकल साइंस में इसको सबसे खामोश लेकिन जानलेवा घटनाओं में से एक है।


एंटी-डिप्रेसेंट दवाओं से शरीर को नुकसान

कई बार मेंटल हेल्थ के लिए एंटी-डिप्रेसेंट दवाएं बहुत जरूरी हो सकती हैं। लेकिन तब जब कोई गंभीर डिप्रेशन से जूझ रहा है। लेकिन इसका सिर्फ दिमाग पर नहीं बल्कि पूरी बॉडी पर पड़ता है। इन दवाओं का हमारे हॉर्मोन बैलेंस, नर्वस सिस्टम और दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी पर होता है।


वहीं दवाएं ब्रेन में डोपामिन, सेरोटॉनिन और नॉरएड्रेनालिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का लेवल बढ़ाने का काम करती हैं। इससे मूड में सुधार होता है। हालांकि कोई दवा कितनी भी फायदेमंद क्यों न हो, लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। अगर आप बिना किसी कंसल्टेशन के दवा ली जाए, तो साइड इफेक्टस और बढ़ जाते हैं।


एंटी डिप्रेसेंट दवाओं के साइड इफेक्ट

बीपी में अचानक बदलाव

दिल की धड़कन में अनियमितता

मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी

चक्कर, सिरदर्द और बेहोशी

नींद में गड़बड़ी

थकान और सुस्ती

वजन बढ़ना या फिर घटना

सेक्स ड्राइव में कमी

पसीना अधिक आना


एंटी डिप्रेसेंट दवाइयों का सडेन कार्डियक डेथ से कनेक्शन

बता दें कि हमारे दिल की धड़कन एक खास रफ्तार और लय में चलती है। जैसे कोई म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट की बीट नियमित, सटीक और तय टाइमिंग पर चलती है। लेकिन कुछ एंटी डिप्रेसेंट दवाएं यह लय बिगाड़ सकती हैं। यह दवाएं दिल की धड़कन को तेज, खतरनाक और अनियमित बना सकती हैं।


जब दिल की धड़कन अचानक से तेज या कभी एकदम धीमा हो जाता है, तो इस कंडीशन में दिल ब्लड पंप करना बंद कर देता है और कुछ सेकेंड्स में व्यक्ति बेहोश हो जाता है। ऐसे स्थिति में फौरन CPR या मेडिकल मदद न मिलने पर मौत भी हो सकती है।


एंटी डिप्रेसेंट दवाओं से कई गुना बढ़ जाता है सडेन कार्डियक डेथ का खतरा

एक स्टडी से बता चला है कि एंटी डिप्रेसेंट दवाएं खा रहे लोगों को अचानक कार्डियक डेथ का खतरा दूसरों की अपेक्षा में ज्यादा होता है। अगर कोई व्यक्ति एंटी डिप्रेसेंट दवाएं ले रहा है, तो उसको अचानक कार्डियक डेथ का खतरा अधिक बढ़ जाता है। जो लोग 6 साल या इससे भी अधिक समय से इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं, उनको सडेन कार्डियक डेथ जोखिम 2.2 गुना बढ़ जाता है।


बता दें कि 30-39 साल की उम्र के लोगों को इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। वहीं जो लोग 1-5 साल से एंटी डिप्रेसेंट ले रहे हैं, तो कार्डियक डेथ का जोखिम 3 गुना बढ़ जाता है। वहीं जो लोग 6 साल या इससे ज्यादा समय से इन दवाओं को खा रहे हैं, उनको सडेन कार्डियक डेथ का खतरा 5 गुना बढ़ जाता है।

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