राकांपा गुटों के विलय की चर्चा पर Devendra Fadnavis बोले, फैसला दोनों दल खुद लेंगे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 07, 2026

नागपुर, सात नवंबर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-शप) के विलय की अटकलों के बीच शनिवार को कहा कि दोनों स्वतंत्र दल हैं और इस संबंध में कोई भी फैसला खुद लेंगे। फडणवीस ने नागपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अगर ऐसा कोई कदम उठाने पर विचार किया जाता है, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से सलाह ली जाएगी। उन्होंने यह टिप्पणी राकांपा नेता सुनील तटकरे के हालिया बयान और इन खबरों के बारे पूछे जाने पर कि दोनों गुटों के बीच साथ आने की संभावनाओं को लेकर बातचीत हो रही है।

फडणवीस ने कहा कि दोनों अलग-अलग राजनीतिक दल हैं और अपने फैसले खुद लेंगे। राकांपा (शप) का नेतृत्व शरद पवार करते हैं और यह पार्टी महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास आघाडी (एमवीए) का हिस्सा है। वहीं, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार राकांपा की प्रमुख हैं और यह पार्टी राज्य में सत्ताधारी गठबंधन ‘महायुति’ में शामिल है।

फडणवीस ने कहा कि राकांपा या राकांपा (शप) की ओर से टिप्पणी करना उनके लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपनी आगे की रणनीति खुद तय करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे इस बात का पूरा यकीन है कि अगर वे ऐसा कोई कदम उठाने का फैसला करते हैं या अगर इस बारे में कोई बातचीत की जा रही है, तो वे हमसे भी सलाह लेंगे।

हम महायुति और राजग में एक प्रमुख साझेदार हैं।” उन्होंने कहा, “आज तक की स्थिति के अनुसार किसी भी पक्ष ने हमसे कोई सलाह नहीं ली है और न ही हमें इस बारे में बताया है कि ऐसी कोई बातचीत की जा रही है। अगर ऐसा कुछ होता है, तो वे हमें जरूर बताएंगे और जब वे हमें बताएंगे, तब हम अपनी प्रतिक्रिया देंगे।” राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के मुंबई के एक अस्पताल में शरद पवार से मिलने और 10 नवंबर के बाद संभावित मुलाकात पर चर्चा करने का वीडियो सामने आने के बीच पार्टी नेता तटकरे ने कहा था कि अगर अजित पवार (जो उस समय राकांपा प्रमुख थे)जीवित होते, तो दोनों गुटों का इस साल फरवरी में ही विलय हो गया होता। दोनों घटनाक्रम से राकांपा के गुटों के विलय को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं।

गोकुल डेयरी से जुड़े राज्य सरकार के हालिया फैसले की आलोचना पर फडणवीस ने इन सुझावों को खारिज कर दिया कि सरकार इस सहकारी संस्था को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है। उन्होंने कहा, “यह सोचना गलत है कि राज्य सरकार गोकुल डेयरी या ऐसी ही किसी संस्था को अपने कब्जे में लेना चाहती है। गोकुल के चुनाव में लगभग 5,000 मतदाता शामिल थे।

यह एक ऐसी संस्था है, जो सिर्फ एक जिले तक सीमित है और जिसका प्रभाव मुख्य रूप से कुछ तालुक में ही है।” फडणवीस ने कहा कि इसलिए ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि राज्य सरकार केवल एक ऐसी संस्था के लिए कुछ करने की इच्छुक है। उन्होंने कहा, “मैं तो यहां तक कहूंगा कि असल में राज्य सरकार को ऐसा करने की कोई जरूरत ही नहीं है।”

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