Devyani-Sapphire merger: केएफसी और पिज़्ज़ा हट के कारोबार में बड़ा बदलाव, शेयर बाजार में हलचल

By Ankit Jaiswal | Jan 02, 2026

हलचल भरे कारोबारी माहौल के बीच फास्ट फूड सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। केएफसी और पिज़्ज़ा हट जैसे ब्रांड्स की भारत में ऑपरेटर कंपनी देवयानी इंटरनेशनल के शेयरों में तेज़ उछाल देखा गया है। कंपनी के शेयर करीब 5.3 प्रतिशत तक चढ़े, जब यह जानकारी सामने आई कि देवयानी इंटरनेशनल अपने प्रतिद्वंद्वी फ्रेंचाइज़ी पार्टनर सैफायर फूड्स इंडिया के साथ विलय की तैयारी कर रही है।


बता दें कि यम! ब्रांड्स के तहत आने वाले केएफसी, पिज़्ज़ा हट और टैको बेल जैसे ब्रांड भारत में फ्रेंचाइज़ी मॉडल पर संचालित होते हैं। इस समय देवयानी इंटरनेशनल, सैफायर फूड्स और बर्मन हॉस्पिटैलिटी इसके प्रमुख पार्टनर हैं। प्रस्तावित सौदे के बाद भारत में यम! ब्रांड्स की दो बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियां एक ही इकाई में आ जाएंगी।


मौजूद जानकारी के अनुसार, इस सौदे की अनुमानित वैल्यू करीब 93.4 करोड़ डॉलर बताई जा रही है। हालांकि देवयानी इंटरनेशनल ने आधिकारिक तौर पर आंकड़ा साझा नहीं किया है। समझौते के तहत, देवयानी इंटरनेशनल, सैफायर फूड्स के प्रत्येक 100 शेयरों के बदले 117 नए शेयर जारी करेगी।


इस घोषणा के बाद जहां देवयानी के शेयरों में तेजी देखी गई, वहीं सैफायर फूड्स के शेयरों में करीब 6.4 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। कंपनी प्रबंधन के मुताबिक यह मर्जर अगले 12 से 15 महीनों में पूरा हो सकता है, बशर्ते नियामकीय और शेयरधारकों की मंजूरी मिल जाए।


गौरतलब है कि इस सौदे से केएफसी के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है, वहीं पिज़्ज़ा हट को भी बाज़ार में दोबारा मजबूती मिल सकती है, जो फिलहाल डोमिनोज़ से काफी पीछे है। यम! ब्रांड्स के सीएफओ रंजीत रॉय ने कहा है कि भारत उनके लिए सबसे अहम बाजारों में से एक है और यहां आगे भी बड़े अवसर मौजूद हैं।


देवयानी इंटरनेशनल का दावा है कि मर्जर के बाद दूसरे साल से कंपनी को सालाना करीब 210 से 220 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सिनर्जी का लाभ मिल सकता है। फिलहाल देवयानी भारत, नेपाल, नाइजीरिया और थाईलैंड में 2,000 से अधिक आउटलेट्स संचालित करती है, जबकि सैफायर के पास भारत और श्रीलंका में कुल मिलाकर करीब 1,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट्स हैं।


गौरतलब है कि यम! ब्रांड्स के लिहाज से भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, और यह सौदा कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

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