Dhurandhar 2 | Jaskirat Singh Rangi से Hamza Ali Mazari बनने का खौफनाक सफर: रणवीर सिंह के किरदार की पूरी कहानी

By रेनू तिवारी | Mar 20, 2026

आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' केवल एक जासूसी थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह एक साधारण पंजाबी मुंडे के 'देशभक्त जासूस' बनने की दर्दनाक गाथा है। फिल्म में रणवीर सिंह ने जसकीरत सिंह रंगी और हमज़ा अली मज़ारी के दोहरे व्यक्तित्व को जिस शिद्दत से जिया है, उसने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया है। आइए समझते हैं कि कैसे पठानकोट का एक नौजवान पाकिस्तान के आतंकी कैंपों का सबसे भरोसेमंद चेहरा 'हमज़ा' बन गया।

इसे भी पढ़ें: Dhurandhar 2 Box Office Day 1 | Ranveer Singh का महा-तूफान! 100 करोड़ की ओपनिंग, 'जवान' और 'कल्कि' के रिकॉर्ड ध्वस्त

 

जेल की कोठरी से RAW के 'ऑपरेशन धुरंधर' तक

हत्या के आरोप में जसकीरत को मौत की सजा सुनाई गई। लेकिन उसकी बहादुरी और सटीक निशानेबाजी ने RAW अफसर अजय सान्याल (R. माधवन) का ध्यान खींचा। सान्याल ने उसे एक विकल्प दिया: "फांसी के फंदे पर झूलो या देश के लिए गुमनाम मौत मरो।" जसकीरत ने दूसरा रास्ता चुना। उसे कड़ी ट्रेनिंग दी गई और उसकी पुरानी पहचान मिटाकर एक नया नाम दिया गया— हमज़ा अली मज़ारी।पहली फिल्म 'धुरंधर' में हमने देखा कि कैसे जसकीरत ने हमज़ा बनकर पाकिस्तान में घुसपैठ की। उसने वहां के कट्टरपंथी संगठनों में जगह बनाई और भारत के लिए सबसे गुप्त सूचनाएं भेजीं। रणवीर सिंह ने इस किरदार में वह 'खामोश दर्द' दिखाया है, जहाँ एक इंसान अपनी मिट्टी और अपनी भाषा को भूलकर दुश्मन की तरह रहने पर मजबूर है।

इसे भी पढ़ें: 'रिवेंज हो तो धुरंधर जैसा', Preity Zinta और Allu Arjun भी हुए Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar 2 के दीवाने

हमज़ा का जन्म कैसे हुआ?

जेल से रिहा होने के बाद, जसकीरत ने कड़ी ट्रेनिंग ली। उसे एक नई पहचान दी गई, और उसने हमज़ा अली मज़ारी नाम अपना लिया। यहीं से पहली फ़िल्म, 'धुरंधर' की कहानी शुरू होती है, जिसमें पाकिस्तान के अंदर उसकी जासूसी गतिविधियों को दिखाया गया है। रणवीर सिंह ने फ़िल्म में शानदार अभिनय किया है, जिससे दर्शक जसकीरत के दर्द को गहराई से महसूस कर पाते हैं। 'धुरंधर: द रिवेंज' बदले, पारिवारिक त्रासदी और देश के लिए दिए गए बलिदान की एक गाथा है।

हमज़ा के किरदार का अंत क्या होता है?

'धुरंधर: द रिवेंज' के अंत में, हमज़ा सुरक्षित रूप से भारत लौट आता है, और अपनी पत्नी यालिना और बेटे ज़यान को पीछे छोड़ जाता है। अपनी असली पहचान जसकीरत में लौटकर, वह जासूस दिल्ली से पठानकोट जाता है ताकि अपनी माँ से मिल सके। वह अपनी माँ को अपनी बहन और उसके दो बच्चों के साथ, अपनी ज़िंदगी में खुशहाल देखकर, फूट-फूटकर रो पड़ता है। हालाँकि, उसे अपनी जासूसी ट्रेनिंग के दौरान कहे गए शुरुआती शब्द याद आते हैं - 'बलिदान परमो धर्मः (बलिदान ही सबसे बड़ा धर्म है)' - और वह उनसे बिना मिले ही वापस लौट जाता है। उनके लिए तो वह बहुत पहले ही मर चुका था। आखिरी कुछ सेकंड में, जसकीरत को मिलिट्री कैंप में अपनी ट्रेनिंग फिर से शुरू करते हुए दिखाया गया है।

प्रमुख खबरें

L&T का बड़ा ऐलान: Middle East संकट से Growth पर लगेगा ब्रेक, आय का अनुमान घटाया

FIFA World Cup 2026 प्रसारण पर फंसा पेंच, क्या सरकारी चैनल DD Sports बनेगा आखिरी सहारा?

Google DeepMind में बगावत: Military AI सौदे पर भड़के कर्मचारी, बनाई शक्तिशाली Union

AI की जंग में Anthropic का नया दांव, OpenAI को टक्कर देने के लिए Banking Sector में उतारे नए Tools