By अभिनय आकाश | Jan 18, 2026
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश है। इसका शक तो खामनेई की एजेंसियों को पहले से ही था। लेकिन अब सबूत साफ मिल चुके हैं। ईरान को बस इसी सबूत की जरूरत थी। यह हथियार ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों जब्त किए जो साफ बताते हैं कि यह पाकिस्तानी मेड है। ईरानी एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान ने न सिर्फ हिंसा भड़काने के लिए हथियार भेजे बल्कि इसके लिए ट्रेंड लोगों को भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ में भेजा। यह सुनकर आप चौंक रहे होंगे कि आखिर एक मुस्लिम देश के संकट से पाकिस्तान का इस्लामिक कट्टरपंथी जनरल मुनीर खुश क्यों होगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जिन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई फूटी आंख नहीं सुहाते। ईरान 22 दिनों से जारी प्रदर्शन के हिंसक दौर से गुजर रहा है। और ऐसे में कुछ सुराग ऐसे मिले हैं जिससे यह पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तान में ट्रेनिंग और ब्लाइंड सपोर्ट दिया गया। ईरान में हिंसा के पीछे मुनीर का स्लीपर सेल, प्रोटेस्टर्स के पास कहां से आए ग्रेनेड?
ईरानी अधिकारी प्रदर्शन की शुरुआत से ही यह कहते आ रहे हैं कि इसमें बाहरी ताकतों का हाथ है। इसमें अमेरिका और इजराइल की बड़ी भूमिका है। लेकिन अब सामने आ चुका है कि मुनीर की गुप्त सेना का हाथ इसमें है। गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के पास से सैन्य हैंड ग्रेनेड मिले हैं। सुराग नंबर दो, हिंसा का पैटर्न बांग्लादेश की तरह है। ईरानी मीडिया में प्रदर्शनकारियों की ट्रेनिंग पाकिस्तान में होने की बात सामने आई है। ईरान में इंटरनेट बंद है। फिर भी प्रदर्शनकारियों के बीच में मैसेजेस सर्कुलेट हो रहे हैं। अस्पतालों में आग, नर्सेज और डॉक्टर्स पर अटैक, बैंकों पर हमले, हिंसा भड़काने की साजिश है।
इन्हीं सुरागों पर ईरानी एजेंसियां अब कंफर्म है कि मुनीर ने बेहद गुप्त तरीके से पाकिस्तान में ट्रेन कुछ लोगों को ईरान भेजा और आम लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच में घुसकर हिंसा भड़काने की साजिश रची। इसके पीछे पाकिस्तान और अमेरिका का सीधा-सीधा हाथ है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि ईरान में संकट बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर के बीच में एक सीक्रेट डील हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप के आदेश पर मुनीर ने हाफिज सईद के आतंकियों को दो नए टारगेट्स दिए थे। इनमें पहला टारगेट ईरान था। इसके तहत ईरान के सर्वोच्च नेता खामनई की हत्या का प्लान है। उनके लिए अमेरिका ने 12 जनवरी को कराची में अपना जहाज भेजा। इस जहाज में ऑटोमेटिक हथियार भरे थे। 13 जनवरी को मुनीर ने ईरान बॉर्डर पर 3000 सैनिक तैनात किए और फिर 14 जनवरी को ईरान पाकिस्तान बॉर्डर से हथियारबंद संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई।
तालिबान के साथ युद्ध में ईरान का अफगानिस्तान के साथ खड़ा होना भी है। आसिम मुनीर अपनी सेना के दम पर ईरान से बदला तो ले नहीं सकता। इसीलिए उसने बदले का दूसरा रास्ता चुना ईरान में हिंसा को बढ़ावा देना। लेकिन इसका अंजाम क्या होगा? ईरान का खलीफा बदला कैसे लेगा? इसका अंदाजा शायद मुनीर को अब तक नहीं है।