By अनुराग गुप्ता | Jan 21, 2022
जलंधर। पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा आसमान छू रहा है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ जनता के बीच में वर्चुअल माध्यमों से पहुंच बना रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस पिछले 5 सालों में किए गए अपनी सरकार के कार्यों और पंजाब को लेकर अपने नए विजन के साथ सत्ता को बरकरार रखने की भरपूर कोशिश कर रही है। ऐसे में हम आपको कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देंगे।
रिपोर्ट कार्ड:-
प्रकाश सिंह बादल सरकार
पंजाब में हमेशा सत्ता दो दलों के इर्द-गिर्द ही घूमती हुई दिखाई दी थी। साल 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने सत्ता संभाली थी। लेकिन एंटी इनकंबेंसी के चलते 2017 में सत्ता गंवा दी और अमरिंदर सिंह की ताजपोशी हुई। उस वक्त बेअदबी मामला, ड्रग्स और किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा काफी अहम था। जिसे कांग्रेस ने भाप लिया था और अमरिंदर सिंह ने पहले ही किसानों से वादा कर दिया कि अगर सरकार बनी को कर्जमाफी होगी और बेअदबी के मामले में कार्रवाई की जाएगी। एंटी इनकंबेंसी के चलते प्रकाश सिंह बादल के हाथों से सत्ता छिन गई और कांग्रेस सरकार ने कर्जमाफी भी की और बेअदबी मामले को लेकर एक कानून बनाने का प्रयास भी किया। हालांकि कोशिश तो प्रकाश सिंह बादल सरकार ने भी की थी लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसे कानूनों को मान्यता देने से इनकार कर दिया था।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब सरकार के रिपोर्ट कार्ड के साथ लोगों के बीच जाने का फैसला किया है। हालांकि पार्टी ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित तो नहीं किया लेकिन मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर एक संकेत जरूर दिया है। हाल ही में कांग्रेस ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें चन्नी लोकलुभाव वादों के साथ लोगों के बीच मे नजर आ रहे हैं। वीडियो ऐसे समय में आया जब पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि जनता तय करेगी मुख्यमंत्री कौन होगा।
कांग्रेस को अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए दूसरे दलों की रणनीति से पार पाना होना। वो भी तब जब अमरिंदर सिंह उनके साथ नहीं हैं। क्योंकि उन्होंने पंजाब लोक कांग्रेस नामक पार्टी का गठन कर भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है और कांग्रेस के कई नेताओं को अपने पाले में कर लिया है। इसके अतिरिक्त शिरोमणि अकाली दल सत्ता में वापसी की हरमुमकिन कोशिश कर रही है। इसके अलावा कई तरह के सर्वे भी सामने आए जिसमें आम आदमी पार्टी की बढ़ती हुई लोकप्रियता को भी दर्शाया गया।