आपने भी तो नहीं कराया डॉ. नरेंद्र से इलाज? मोक्ष की गारंटी पक्की, विधानसभा अध्यक्ष भी गंवा चुके हैं जान

By अभिनय आकाश | Apr 08, 2025

हिंदुस्तान में ज़िंदगी की कीमत बहुत ही सस्ती है। यह ज़िंदगी और भी सस्ती हो जाती है जब आदमी गरीब होता है। थोड़ी और सस्ती हो जाती है जब आदमी गरीब होने के साथ ही गांव में रहता है और तब तो लगभग मुफ़्त ही हो जाती है जब वह गांव का गरीब होने के साथ ही राजधानी से दूर किसी छोटे से शहर या कस्बे में जीवन काट रहा होता है। आज आपको एक ऐसे डॉक्टर की कहानी बताऊंगा जो ब्रिटिश डॉक्टर की पहचान चुराता है और उसकी बदौलत दर्जन भर फर्जी सर्जरी को भी अंजाम दे देता है। मध्य प्रदेश के दमोह से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को चौंका दिया है। मध्य प्रदेश के दमोह के फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेंद्र जॉन कैम को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से गिरफ्तार किया गया है। कथित तौर पर 7 मरीज, जो कि दिल की बीमारियों के इलाज के लिए इस चर्चित डॉक्टर की देखरेख में भर्ती हुए थे, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर गंवानी पड़ी। 

दमोह के फर्जी डॉक्टर का कैसे हुआ पर्दाफाश 

पुलिस ने यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल एक्ट की कई धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए हैं, जिसमें उन पर जालसाजी, अनधिकृत चिकित्सा पद्धति और मरीजों की मौत में संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम. के. जैन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यादव या कैम ने मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत हुए बिना एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी प्रक्रियाएं कीं। डॉ. जैन की जांच में कैम की साख में गंभीर खामियां सामने आईं। मिशन अस्पताल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में "आवश्यक पंजीकरण विवरण" गायब पाए गए। चूंकि मध्य प्रदेश में किसी भी डॉक्टर को उचित पंजीकरण के बिना अभ्यास करने की अनुमति नहीं है, इसलिए इन दस्तावेजों की अनुपस्थिति ने कैम की योग्यता के बारे में और चिंताएं पैदा कर दीं। डॉ. जैन ने औपचारिक रूप से पुलिस से कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

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फर्जी मेडिकल लाइसेंस, हार्ट सर्जरी के बाद मरीजों की मौत

यह जांच कलेक्टर सुधीर कोचर के निर्देशन में शुरू की गई थी। डॉ. एम.के. जैन, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विशाल शुक्ला और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रांत सिंह चौहान की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की। उन्होंने पाया कि कैम द्वारा की गई प्रक्रियाओं के बाद कई मरीजों की मौत हो गई थी और उनकी योग्यता में महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। जब जांच दल ने मिशन अस्पताल में कैम को खोजने का प्रयास किया, तो उन्हें बताया गया कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उनके प्रमाण-पत्रों की आगे की जांच से पता चला कि आंध्र प्रदेश मेडिकल काउंसिल से उनके प्रमाण-पत्र पर पंजीकरण संख्या अमान्य थी, जिसका ऑनलाइन डेटाबेस में कोई मिलान रिकॉर्ड नहीं था, जिससे उनकी योग्यता पर गंभीर संदेह पैदा हुआ।

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छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष का भी किया था ऑपरेशन

बताया जा रहा है कि जिस फर्जी डॉक्टर को लेकर मध्य प्रदेश में हंगामा मचा हुआ है,ये वही शख्स है जिसने साल 2006 में छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की सर्जरी की थी और इसके बाद उनकी भी मौत हो गई। ये मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल का था जहां नरेंद्र विक्रमादित्य यादव नौकरी करता था। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे ने आरोप लगाया है कि 2006 में विक्रमादित्य यादव उर्फ जॉन केम ने उनके पिताजी का भी ऑपरेशन किया था।

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