By एकता | Oct 15, 2026
सर्दियों में सुबह के समय धुंध और कोहरा इतना ज्यादा होता है कि कई बार समझ ही नहीं आता कि सामने की हवा में आखिर है क्या। लेकिन हर धुंध को कोहरा समझना सही नहीं है। कई बार इसके पीछे हवा में मौजूद प्रदूषण भी हो सकता है। कोहरा, धुंध और स्मॉग देखने में भले ही एक जैसे लगें, लेकिन इनके बीच बड़ा फर्क है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये तीनों कैसे बनते हैं और इनमें से कौन आपकी सेहत के लिए ज्यादा चिंता की बात है।
कोहरा खासतौर पर तब ज्यादा बनता है, जब रात में हवा शांत हो और उसमें नमी ज्यादा हो। ठंड बढ़ने पर हवा की नमी पानी की छोटी बूंदों में बदल जाती है और सुबह हमें घना कोहरा दिखाई देता है। घना कोहरा सड़क पर गाड़ी चलाने और हवाई यात्रा में परेशानी पैदा कर सकता है। लेकिन जरूरी नहीं कि कोहरा होने का मतलब उस समय प्रदूषण भी बहुत ज्यादा हो।
अब बात करते हैं धुंध की। धुंध तब दिखाई देती है, जब हवा में मौजूद बहुत छोटे-छोटे कण सूरज की रोशनी को चारों तरफ फैला देते हैं। इससे दूर की चीजें साफ नजर नहीं आतीं और आसमान भी फीका-फीका दिखाई देता है। इन कणों में धूल, धुआं और प्रदूषण शामिल हो सकते हैं। हवा में मौजूद छोटे कण जितने ज्यादा होंगे, उतनी ही ज्यादा धुंध दिखाई दे सकती है। धुंध सिर्फ एक छोटे इलाके तक सीमित नहीं रहती। हवा में मौजूद ये छोटे कण काफी दूर तक जा सकते हैं, इसलिए बड़े इलाके में भी धुंध दिखाई दे सकती है।
स्मॉग को आसान भाषा में प्रदूषण वाली धुंध कह सकते हैं। यह प्रदूषित हवा से जुड़ा होता है। स्मॉग शब्द धुएं और कोहरे से मिलकर बना है, लेकिन आज के समय में स्मॉग होने के लिए कोहरा होना जरूरी नहीं है। हवा में मौजूद बहुत छोटे प्रदूषण वाले कण और जमीन के पास मौजूद ओजोन जैसी प्रदूषित गैसें भी इसमें शामिल हो सकती हैं।
कुछ तरह का स्मॉग तब बनता है, जब हवा में मौजूद प्रदूषक सूरज की रोशनी के संपर्क में आकर आपस में प्रतिक्रिया करते हैं। वहीं, कुछ मामलों में गाड़ियों और दूसरी जगहों से निकलने वाला प्रदूषण जमीन के पास ही जमा होता रहता है।
अब सवाल आता है कि अगर कोहरा और स्मॉग अलग-अलग हैं, तो सर्दियों में दोनों एक साथ क्यों नजर आते हैं? उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान तापमान कम हो जाता है और कई बार हवा भी बहुत धीमी चलती है। ठंड और हवा में ज्यादा नमी से कोहरा बनने में मदद मिलती है। वहीं, धीमी हवा के कारण प्रदूषण आसानी से फैल नहीं पाता और जमीन के आसपास ही जमा रहने लगता है।
जब हवा में नमी और प्रदूषण दोनों एक साथ होते हैं, तो हमें आसमान पर एक मोटी धूसर परत दिखाई दे सकती है। ऐसे में सिर्फ देखकर यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सामने कोहरा है, धुंध है या प्रदूषण। लेकिन एक बात याद रखें कोहरा और स्मॉग एक ही चीज नहीं हैं। कोहरा मौसम से जुड़ा है, जबकि स्मॉग प्रदूषण से जुड़ा है। इसलिए अगर सुबह बहुत ज्यादा कोहरा है, तो इसका यह मतलब नहीं है कि हवा में प्रदूषण भी बहुत ज्यादा है। इसी तरह आसमान साफ दिखने का मतलब यह भी नहीं है कि हवा पूरी तरह साफ है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि हवा में क्या मौजूद है और उसकी मात्रा कितनी है। कोहरे से सबसे बड़ी परेशानी आमतौर पर कम दिखाई देना है। हालांकि, कोहरे की पानी की बूंदें हवा में मौजूद प्रदूषण के संपर्क में आ सकती हैं।
वहीं, प्रदूषण की वजह से बनी धुंध इस बात का संकेत हो सकती है कि हवा में ऐसे छोटे कण मौजूद हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इनमें पीएम 2.5 खास चिंता की बात है। ये बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के साथ फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मुताबिक, इनके संपर्क में आने से सांस और दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, उन्हें ऐसे प्रदूषण से ज्यादा परेशानी हो सकती है।
एक बात हमेशा याद रखें सिर्फ आसमान का रंग देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि हवा सांस लेने के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके इलाके की हवा कितनी साफ या प्रदूषित है, तो भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई को चेक करें। प्रदूषण ज्यादा होने पर स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सलाह का भी ध्यान रखें। तो आसान भाषा में याद रखिए कोहरा पानी की छोटी बूंदों से बनता है, धुंध हवा में मौजूद छोटे कणों की वजह से दिखाई देती है और स्मॉग प्रदूषण वाली हवा से जुड़ा होता है। कई बार ये तीनों एक साथ भी नजर आ सकते हैं। इसलिए सिर्फ खिड़की से बाहर देखकर हवा की स्थिति का अंदाजा लगाने के बजाय मौसम की जानकारी के साथ एक्यूआई भी देखना ज्यादा बेहतर है।