By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने बृहस्पतिवार को ‘जन नीति भारत’ नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की और कहा कि उनकी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी। मित्तल ने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश में कहा कि उनकी पार्टी नीति निर्माण की प्रक्रिया में आम लोगों को केंद्र में रखेगी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान लगातार जनता के प्रति जवाबदेह बनी रहे, न कि केवल चुनाव के समय। पार्टी के नाम और आगामी विधानसभा चुनाव में भाग लेने के फैसले की घोषणा करते हुए मित्तल ने कहा, ‘‘राजनीति आप पर शासन करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक दल भले ही एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते दिखें, लेकिन वे निर्णय-निर्माण को आम लोगों के हाथों से दूर रखने पर सहमत हैं।’’ मित्तल ने कहा कि जन नीति भारत के पास बड़े पैमाने पर विज्ञापन देने के लिए पैसे नहीं हैं, इसके बजाय वे घर-घर जाकर प्रचार करेंगे, जहां हर घर एक कार्यालय की तरह होगा और हर समर्थक एक प्रचारक की भूमिका निभाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उन्हें अपने गांवों और कस्बों में बुलाएं, उनके संदेश को कम से कम तीन अन्य लोगों तक पहुंचाएं और राजनीति नहीं, जन नीति के नारे का प्रचार करें। मित्तल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), बेंगलुरु की छात्रा रह चुकी हैं।
उन्होंने 13 साल के करियर के बाद 30 अगस्त को भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद उन्होंने 29 सितंबर को राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा की थी। नयी पार्टी के गठन के साथ ही मित्तल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने का ऐलान किया है।
उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में जनता को केंद्र में रखकर नीतियां बनाने और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के मुद्दों पर ध्यान देगी। मित्तल ने ‘जन नीति भारत’ पार्टी की नीतियों के निर्माण में जन भागीदारी, जरूरत आधारित फैसलों और सरकारी कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तीन संकल्प पेश किए हैं। अपने आठ मिनट 27 सेकंड के वीडियो में उन्होंने कहा कि नीतियां प्रभावित लोगों की जरूरतों के अनुरूप बननी चाहिए और उनके क्रियान्वयन में विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए।
मित्तल ने देवकली देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी मांग पर स्कूल का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन जमीन वन भूमि होने के कारण काम रोक दिया गया। उन्होंने औद्योगिक परियोजनाओं और गरीबों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में अंतर पर सवाल उठाया। दूसरे संकल्प के तहत मित्तल ने सार्वजनिक कार्यों की प्राथमिकताएं लोगों की जरूरतों के आधार पर तय करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि फैसले चुनिंदा लोगों के प्रभाव के बजाय सामूहिक जरूरतों पर आधारित होने चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए उन्होंने मोबाइल ऐप का सुझाव दिया, जिसके जरिये असुरक्षित स्थानों की जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि किसी स्थान पर 100 शिकायतें मिलने पर वहां रोशनी, पुलिस गश्त और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
मित्तल ने तीसरे संकल्प में सरकारी परियोजनाओं की लागत, समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि आवास सहायता जैसी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सीधे लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर भेजी जानी चाहिए ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो। मित्तल ने स्कूलों, अस्पतालों, राशन दुकानों और सार्वजनिक कार्यों के मूल्यांकन के लिए तीन रंगों वाली प्रतिक्रिया प्रणाली का सुझाव दिया, जिसमें हरा रंग संतोषजनक, पीला अधूरे और लाल खराब काम को दर्शाएगा।
उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को लोगों की शिकायतें सुनने, डिजिटल माध्यमों का उपयोग नहीं कर पाने वालों की मदद करने और उनकी समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।