By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 29, 2022
नयी दिल्ली। यूरोपीय संघ के मानवाधिकार पर विशेष प्रतिनिधि इमोन गिल्मोर ने शुक्रवार को कहा कि भारत सरकार से उनकी हुई मुलाकात के दौरान देशद्रोह और आतंकवाद रोधी कानूनों के इस्तेमाल, अल्पसंख्यकों की स्थिति, सांप्रदायिक हिंसा और जम्मू-कश्मीर की हालात जैसे मुद्दों पर चर्चा की। गिल्मोर ने यह भी कहा कि भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्यों के साथ हुई उनकी मुलाकात के दौरान विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (एफसीआरए), हिरासत, जमानत, देशद्रोह और आतंकवाद रोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधि (निषेध) अधिनियम (यूएपीए), अल्पसंख्यकों और व्यक्तियों के मामलों में आयोग की भूमिका पर भी चर्चा हुई।
सूत्रों ने बताया कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि कुछ लोग हैं जो लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को ‘साजिश’ के तहत ‘बदनाम’ करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि कई बार वे पत्र लिखते हैं जबकि बाकी समय में वे ‘‘इस्लोफोबिया’’ का मुद्दा उठाते हैं। नकवी ने इस बात पर भी जोर दिया कि मोदी सरकार ने पिछले आठ साल में अलपसंख्यक समुदाय के करीब पांच करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति दी है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि केंद्र सरकार की नौकरियों में अल्पसंख्यकों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सूत्रों ने बताया कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को कहा कि अल कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठन ‘‘ अपने नापाक’’मंसूबों में यूरोप व अन्य देशों मेंसफल हो सकते हैं लेकिन भारत में वे कभी सफल नहीं हुए , और भारत की सांस्कृतिक सह अस्तित्व और अनेकता में एकता की मजबूती से यह हुआ।