Shaurya Path: Israel-Hamas, America Russia-Ukraine और China से जुड़े मुद्दों पर चर्चा

By अंकित सिंह | May 02, 2024

प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में हम लगातार वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में इस बार भी मौजूद रहे ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी जी। ब्रिगेडियर साहब से हमने हमास और इजराइल युद्ध पर चर्चा की। साथ ही साथ अमेरिका में जिस तरह की घटनाएं हुई है, उस पर भी सवाल पूछे। हमने यह भी पूछा कि आखिर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आगे की राजनीति क्या है? रूस-यूक्रेन की भी चर्चा इस बार के प्रोग्राम में हुई। हमने ब्रिगेडियर त्रिपाठी से मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। साथ ही साथ अमेरिका और नाटो को लेकर उठ रहे सवालों पर भी हमने ब्रिगेडियर त्रिपाठी से जवाब मांगा। वहीं, हाल के दिनों में देखें तो चीन और बांग्लादेश की सेना संयुक्त युद्ध अभ्यास करने जा रही है। यह जाहिर सी बात है कि भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। इस युद्ध अभ्यास का भारत पर कितना असर पड़ सकता है, इसको लेकर भी हमने ब्रिगेडियर त्रिपाठी से सवाल पूछा?

2. उधर रूस ने यूक्रेन के डोनेस्क में एक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कस्बे पर कब्जा कर लिया है। हथियार व सैनिकों की कमी से जूझती हुई यूक्रेनी सी वहां से पीछे हट गई है। क्या रूस अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए हुए हैं? 

- ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि युद्ध लंबे हुए हैं। लेकिन इस तरह के लगातार आक्रमण हमने नहीं देखे हैं। रूस-यूक्रेन के बीच लगातार युद्ध चल रहा है। रूस ने जिन जगहों पर कब्जा किया है वहां वह खुद को मजबूत कर रहा है। रूस की अब नजर यूक्रेन के बड़े शहरों पर है। इसमें खारकिव और डोनेस्क भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन लगातार कमजोर हुआ है। रूस यूक्रेन के खिलाफ रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। रूस की नजर अब यूक्रेन के मिलिट्री बेस पर भी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में हथियार की कमी है। यूक्रेन का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरीके से डैमेज हो गया है। यूक्रेन में मैनपावर की भी कमी है जिसकी वजह से मोराल डाउन हुआ है। रूस का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। वह खुद को हर मामले में मजबूत कर चुका है। पुतिन इस बात को लेकर पूरी तरीके से कॉन्फिडेंट नजर आ रहे हैं कि वह अपना टारगेट हासिल करेंगे। 

3. इसी से जुड़ा एक और प्रश्न क्या अमेरिका और नाटो देशों से जो सैन्य सहायता यूक्रेन को देने की घोषणा हुई है उससे यूक्रेन रूस की बढ़त को रोक पाएगा और क्या अपना इलाका वापस लेने में सक्षम हो पाएगा?

- ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि यह लड़ाई अमेरिका-नाटो बनाम रूस की है। उन्होंने कहा कि जो अभी तक यूक्रेन को मिला है, उससे उसे फायदा नहीं हुआ है। ऐसे में अब क्या फायदा होगा। रूस लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। वहीं दूसरी ओर यूक्रेन हर मामले में पिछड़ता जा रहा है। यूक्रेन को कुछ नहीं मिला है। मदद के बावजूद भी यूक्रेन ने अपनी थोड़ी ताकत भी नहीं बढ़ाई है। रूस स्ट्रांग पोजीशन में है। उसे यूक्रेन से ज्यादा नाटो और अमेरिका को अपनी ताकत दिखानी है। हालांकि पुतिन जो लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे थे, वह से अब तक वह पूरा नहीं कर पाए हैं। यूक्रेन ने समय-समय पर पलटवार भी किया है। हालांकि यूक्रेन कोई प्लान नहीं बन पाया जबकि रूस रणनीति के साथ आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि अगर मैनपॉवर होगा तभी हथियार काम आएंगे। नाटो और अमेरिका इस युद्ध के बाद एक्सपोज हुए हैं। यही कारण है कि कई देश खुद को रक्षा के क्षेत्र में मजबूत करने लगे हैं। रूस को रोकने के लिए यूक्रेन को फिर से अपनी ताकत दिखानी होगी। 

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4. चीन और बांग्लादेश की सेना इसी महीने पहली बार संयुक्त युद्ध अभ्यास करने जा रही है। क्या यह चीन द्वारा भारत को रणनीतिक रूप से घेरने की एक और कार्रवाई है?

- उन्होंने कहा कि जाहिर सी बात है कि भारत के लिए यह युद्ध अभ्यास चिंता की बात है। चीन लगातार भारत के पड़ोसी देशों में दखल को बढ़ा रहा है। हम इसे इतनी आसानी से नहीं देख सकते हैं। बांग्लादेश और चीन के बीच में पहली बार युद्ध अभ्यास हो रहा है। कहा जा रहा है कि यह एक दूसरे की मदद के लिए है। लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता है। चीन कहीं ना कहीं बांग्लादेश के भीतर खुद को मजबूत करने की कोशिश करने का है। पाकिस्तान और बांग्लादेश लगातार चीन से हथियार खरीदते हैं। ऐसे में चीन बांग्लादेश के भीतर प्लांट भी स्थापित कर सकता है। चीन बांग्लादेश में इन्वेस्ट कर रहा है। चीन अपने लिए बांग्लादेश में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत को सावधान रहने की आवश्यकता है। बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर पर चीन की नजर है। चीन यहां डोमिनेट करना चाहता है। यह कहीं ना कहीं भारत के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में भारत को भी इससे निपटने की रणनीति बनाने होगी। साथ ही साथ ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि भारत के अंतरराष्ट्रीय रिश्ते तो मजबूत हुए हैं। लेकिन कई पड़ोसी देशों के साथ उसके रिश्ते चीन की वजह से बिगड़े हैं। ऐसे में इसमें सुधार की गुंजाइश है। 

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