Shaurya Path: Rafah, China-Taiwan, India Defence Export और Russia-Ukraine से जुड़े मुद्दों पर चर्चा

By अंकित सिंह | May 30, 2024

प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम शौर्यपथ में ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी से हमने विश्व के वर्तमान हालात पर चर्चा की। राफा में इजरायल के लगातार आक्रमण पर हमने त्रिपाठी सर से सवाल पूछा। साथ-साथ जानना चाहा कि आखिर इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू चाहते क्या है? इसके साथ ही हमने रूस यूक्रेन युद्ध से संबंधित सवाल भी ब्रिगेडियर त्रिपाठी से पूछा। इस युद्ध के वर्तमान हालत क्या है और रूस की आगे की नीति क्या रहने वाली है? ब्रिगेडियर त्रिपाठी से हमने चीन के विस्तारवादी नीति को लेकर सवाल पूछा और जानना चाहा कि ताइवान के आसपास चीन के युद्ध अभ्यास के क्या मायने हैं? वहीं आत्मनिर्भर भारत से संबंधित भी सवाल हमारे चर्चा के विषय में रहा। 

2- अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा दिए गए कुछ हथियार और रॉकेट व मिसाइल्स को रूस ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तथा जैमिंग द्वारा निष्क्रिय बना दिया है। इसका क्या असर पड़ रहा है?

- इस सवाल के जवाब में ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि खारकीव पर रूस का पूरी तरीके से फोकस दिखाई दे रहा है। रूस उस ओर लगातार बढ़ भी रहा है। रूस पूरी तरीके से बमबारी कर रहा है जबकि यूक्रेन मजबूर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति इधर-उधर से मदद मांग रहे हैं। यूक्रेन की सेना पूरी तरीके से कमजोर नजर आ रही है। यूरोप को भी अब लग रहा है कि हम अगर सीधे इस युद्ध में पड़े तो हमको भी नहीं छोड़ेगा। रूस का आक्रामक रवैया लगातार जारी है। रूस अपने ऑपरेशन में लगा हुआ है। जबकि यूक्रेन के पास कोई विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है। यूक्रेन के पास ना तो मैनपॉवर है ना हथियार है। जबकि रूस पूरी प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रहा है। वहीं यूक्रेन दूसरे पर निर्भर है। 

3- चीन ने ताइवान के नजदीक तीन दिन का एक आक्रामक युद्ध अभ्यास किया है। इससे चीन ने क्या संदेश देने की कोशिश की है? 

- ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि चीन के विस्तारवादी नीति जारी है। हम लगातार इसका प्रमाण देखते रहते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश वन चीन के सिद्धांत पर चल रहे हैं। इसमें अमेरिका भी शामिल है। हालांकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह ताइवान के साथ हमेशा खड़ा रहेगा। नैंसी पॉलिसी की यात्रा के बाद से विवाद ज्यादा बढ़ गया था। चीन लगातार कह रहा है कि ताइवान के मामले में अमेरिका को बीच में नहीं आना चाहिए। लेकिन अमेरिका ताइवान के साथ खड़ा रहने दम भर रहा है। ताइवान खुद को लगातार डेमोक्रेटिक देश बताता रहा है जबकि चीन को यह पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध अभ्यास का मतलब साफ है कि चीन अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है। वह आगे भी इस तरीके की चीज करता रहेगा। पिछले दिनों में भी उसने कई युद्ध अभ्यास किए थे। ब्रिगेडियर त्रिपाठी ने कहा कि चीन इसके जरिए रेकी करने की भी कोशिश कर रहा है। उसकी ओर से घेराबंदी की भी कोशिश है। उन्होंने कहा कि चीन ऐसा प्रवोक करने के लिए कर रहा है। 

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4. भारत की कंपनी म्युनिशंस इंडिया ने हाल ही में करीब 1 लाख 155 मिनी गन के एम्युनिशन का निर्यात किया है। क्या आप इसको एक बड़ी उपलब्धि देखते हैं।

- उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह अच्छी खबर है। आत्मनिर्भर भारत की ओर अपना देश बढ़ रहा है। इससे ज्यादा हमें क्या चाहिए। डिफेंस एक्सपोर्ट के क्षेत्र में हम जितना आगे बढ़ेंगे, हमारी सैन्य शक्ति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इसकी जरूरत हर जगह है। हर जगह इसकी डिमांड बढ़ी है। इसका खूब इस्तेमाल होता है। यह बनाना ही अपने आप में बड़ी बात है। यह हाई एक्सप्लोसिव होता है। हम लगातार दुनिया के कई देशों में अपने हथियार को एक्सपोर्ट कर रहे हैं।  

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