By नीरज कुमार दुबे | Sep 14, 2026
मुंबई की चर्चित दिशा सालियान मौत मामले में छह साल बाद जांच ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज कर दी है। बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने आज इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली। हम आपको याद दिला दें कि दिशा सालियान दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं और आठ जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने उस समय इसे दुर्घटनावश हुई मौत मानते हुए केवल आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की थी। लेकिन अब उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों के बाद जांच का दायरा अचानक बेहद व्यापक हो गया है।
हम आपको यह भी बता दें कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। इसमें कहा गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों ने कथित साजिश और उसके बाद मामले को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों पर मामले से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों को नष्ट करने या दबाने, सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर करने तथा अपराध में शामिल लोगों को बचाने के लिए सरकारी धन, जनशक्ति और पुलिस तंत्र के कथित दुरुपयोग की भी जांच की जाएगी।
जांच एजेंसी ने कथित मुख्य अपराध के साथ आपराधिक साजिश, बाद में आत्महत्या की एक कथित झूठी कहानी तैयार करने और उसे फैलाने तथा साक्ष्यों को दबाने, नष्ट करने या उनमें कथित हेरफेर किए जाने जैसे पहलुओं को भी जांच का हिस्सा बनाया है। मालवणी थाने से जुड़े पुलिस अधिकारियों, दिशा के शव का परीक्षण करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों, कालिना स्थित प्रयोगशाला के अधिकारियों, रीजेंट गैलेक्सी इमारत के सुरक्षा कर्मचारियों, विशेष जांच दल के सदस्यों और कई अज्ञात लोगों की भूमिका भी जांची जाएगी।
देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी पृष्ठभूमि बंबई उच्च न्यायालय का वह आदेश है, जिसमें अदालत ने दिशा सालियान की मौत की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने मुंबई पुलिस की छह वर्षों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं करने को लेकर सवाल उठाए और कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों के जवाब देने की बजाय नए सवाल खड़े करती है। अदालत ने मामले को केवल दुर्घटनावश हुई मौत मानकर आगे बढ़ने के फैसले पर भी सवाल उठाया और जांच में स्पष्ट विसंगतियों की ओर संकेत किया।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दिशा सालियान की मौत के ठीक छह दिन बाद, 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने बांद्रा स्थित आवास पर मृत पाए गए थे। दोनों मौतों के बीच बेहद कम अंतर होने के कारण उस समय से ही इनके बीच संभावित संबंध को लेकर व्यापक अटकलें लगती रही हैं, हालांकि दोनों मामलों की जांच अलग-अलग की गई। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया था। बाद में जांच एजेंसी ने आत्महत्या को मौत का कारण बताते हुए मामले को बंद करने की रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन संबंधित अदालत में उस रिपोर्ट पर अभी सुनवाई होना बाकी है।
उधर, दिशा के पिता सतीश सालियान पहले ही आदित्य ठाकरे और अभिनेता डिनो मोरिया सहित कई लोगों पर अपनी बेटी की मौत के संबंध में आरोप लगा चुके हैं। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने जांचकर्ताओं को उन घटनाओं के बारे में पूरी जानकारी दी, जिनके बारे में वह जानते थे, और कई लोगों के नाम भी बताए। उनके अनुसार उन्होंने आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और अंगरक्षकों के नाम जांचकर्ताओं को दिए हैं और अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सतीश सालियान ने यह भी कहा कि उन्होंने जो कुछ बताया, वह तथ्यों के आधार पर बताया है और उन्हें विश्वास है कि अंततः सत्य की जीत होगी।
बहरहाल, अब केंद्रीय जांच ब्यूरो की प्राथमिकी ने छह साल पुराने इस मामले को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि प्राथमिकी में किसी व्यक्ति का नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आरोपों की सच्चाई, कथित साजिश की वास्तविकता और साक्ष्यों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई या नहीं, इसका फैसला जांच और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि जिस मामले को वर्षों तक दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में सीमित रखा गया, उसकी जांच अब कहीं अधिक गंभीर और व्यापक सवालों के साथ आगे बढ़ने जा रही है।