‘वोकल फॉर लोकल’ के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ वाली दिवाली

By सर्वेश तिवारी | Nov 02, 2021

दिवाली का त्योहार बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे अनेक धार्मिक कथाएँ जुड़ी हुयीं हैं लेकिन साथ ही साथ इसमें एक सामाजिक उद्देश्य भी निहित है। इस त्योहार को सामाजिक सद्भावना के रूप में भी मनाया जाता है, आपसी मतभेद और मनभेद भूलकर लोग एक दुसरे से मिलते हैं और खुशियों का संचार होता है। आज के व्यस्त जीवनचर्या में विभिन्न तरह के त्योहार खुशियाँ लेकर आते हैं। भारत देश के प्रमुख त्योहारों में से एक दिवाली , सामाजिक समानता का भी परिचायक है। गरीब हो या अमीर सब लोग अपनों के साथ खुशियाँ बांटते हैं। त्योहारों के आने से बाजारों में रौनक भी खूब होती है। पिछले डेढ़ साल से अधिक, कोरोना महामारी के कारण लोग अपने घरों में ही रहे तथा एक दूसरे से मिलना भी बहुत कम रहा है। व्हाट्सअप और ज़ूम मीटिंग जैसे तकनीकी से भले ही लोग एक दुसरे से मिलते रहे हैं, पर आभासी दुनियां और वास्तविक दुनियां में बहुत अंतर है। त्योहार या किसी कार्यक्रम की रौनक वास्तविक दुनियां में अधिक है। इस महामारी ने त्योहारों की रौनक बहुत कम कर दी, लेकिन वैक्सीनेशन के बाद स्थितियां बदल रही हैं, फिर भी हम सबकी यह जिम्मेदारी है की कोविड सुरक्षा नियमों को ध्यान में रखते हुए दिवाली मनायें । यह त्योहार आज इस बात का भी प्रतीक होगा की देशवासी के रूप में हम सबने कोविड नियमों का पालन करते हुए इसपर जीत दर्ज की है अर्थात महामारी जैसे दानव पर देशवासियों ने विजय प्राप्त की है। और इस दिवाली को विजयोत्सव के रूप में मना रहे हैं।  

इसे भी पढ़ें: अंकिता लोखंडे और विक्की जैन की दिसंबर में हुई शादी फिक्स, जानें कैसा होगा वेडिंग फंक्शन, कौन-कौन होगा शामिल

दिवाली का यह प्रकाशपर्व आम जनमानस के जीवन में खुशियाँ लाये, यहाँ रोजगार के अवसर बनें और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना साकार हो, एक भारतीय नागरिक के रूप में हम सभी को यह प्रयास करना चाहिए। आपने अपने परिवार में यह देखा होगा की जब घर का कोई सदस्य आत्मनिर्भर होता है अर्थात आर्थिक रूप से स्वयं सक्षम होता है तो उसको पूछने वाले बहुत लोग होते हैं। कुछ ऐसा ही आत्मनिर्भर भारत बनने के बाद हमारे देश के साथ भी होगा। क्योंकि आर्थिक उन्नति से ही हम एक देश के रूप में विकसित होते हुए विश्व में अपनी जगह बना पायेंगे और देश की विकास यात्रा में आप या हम, ‘लोकल के लिए वोकल’ होकर योगदान दे सकते हैं। दिवाली, खुशियाँ मनाने के साथ ही खुशियाँ बांटने का भी त्योहार है। इसलिए आईये मिलकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर कदम बढाएं तथा आम जन-जीवन में उत्साह का प्रकाश फैलाते हुए, खुशियों के दीप जलाएं !   

सर्वेश तिवारी

( लेखक सक्षम चंपारण के संस्थापक और निर्भया ज्योति ट्रस्ट के महासचिव हैं और कृषि, पर्यावरण, शिक्षा एवं अन्य सामाजिक कार्य के लिए लगातार आवाज उठाते हैं।) 

प्रमुख खबरें

Punjab and Haryana High Court ने दी अनुमति, मानसा के पैतृक गांव में होगा दलजीत का अंतिम संस्कार

Delhi Drugs Control Department ने 569 निरीक्षणों में पकड़े 272 उल्लंघन, नकली दवाएं पकड़ीं

Election Commission का फैसला: SIR मसौदे से छूटे दिल्ली के वोटर बिना कानूनी कार्रवाई के भरें Form 6

Odisha Flood Relief: चक्रवात प्रभावित परिवारों को मिलेंगे 107.7 करोड़ रुपये