By नीरज कुमार दुबे | Oct 24, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कथित स्टिंग ऑपरेशन का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि कर्नाटक की राजनीति में एक और स्टिंग की खबर ने हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को गुप्त कैमरे के जरिए फंसाने की कोशिश की गई, जबकि भाजपा और एनडीए के मुख्यमंत्रियों को निशाना नहीं बनाया गया। इस खुलासे ने सियासी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है।
शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को भी सतर्क कर दिया है। उन्होंने कहा कि नेताओं को निजी सहायकों, फोन कॉल और दूसरे माध्यमों से फंसाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित लोगों के बारे में जानकारी और रिकॉर्ड उनके पास हैं, लेकिन अभी नाम सार्वजनिक नहीं करेंगे। उनका कहना था कि सरकार ने एहतियाती कदम उठाए हैं और कार्रवाई के बारे में हर जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है। हालांकि, शिवकुमार ने न तो उस उद्योगपति का नाम बताया और न ही कथित रिकॉर्डिंग के सबूत पेश किए हैं।
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उधर, शिवकुमार के ताजा आरोपों को सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो विवाद से अलग करके नहीं देखा जा सकता। सिद्धारमैया ने वीडियो को अपनी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश बताते हुए पुलिस जांच की मांग की है। 14 अक्टूबर को बेंगलुरु की एक अदालत ने संबंधित वीडियो के प्रसारण और प्रसार पर अंतरिम रोक लगा दी थी। मामले में पुलिस जांच जारी है। सिद्धारमैया ने कहा है कि वीडियो उन्हें ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार किया गया। उनके बेटे और मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने भी कांग्रेस के कुछ लोगों की संभावित भूमिका का आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, इस प्रकरण ने कांग्रेस के भीतर सिद्धारमैया और शिवकुमार के समर्थक खेमों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया है। सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने और शिवकुमार के सत्ता संभालने के घटनाक्रम के बाद यह विवाद और संवेदनशील हो गया है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि कहीं कथित स्टिंग का इस्तेमाल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और प्रभाव हासिल करने की लड़ाई में तो नहीं हुआ?
इस बीच, केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने इस पूरे प्रकरण में शिवकुमार पर ही सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया से जुड़े वीडियो का इस्तेमाल उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के दबाव के लिए किया गया हो सकता है। कुमारस्वामी ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा है। दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक रवि कुमार गणिगा ने आरोप लगाया था कि एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक भाजपा के एक नेता ने निजी एजेंसी के जरिए राज्य के करीब दस मंत्रियों तथा मुख्यमंत्री कार्यालय को निशाना बनाने की योजना के लिए धन मुहैया कराया। उन्होंने कथित सबूतों वाली एक पेन ड्राइव का भी उल्लेख किया है।
वहीं मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सिद्धारमैया के खिलाफ स्टिंग कराने की साजिश रचने के आरोपों को खारिज किया है। बताया जा रहा है कि राज्य मंत्रिमंडल ने मामले पर चर्चा तो की, लेकिन फिलहाल अलग विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला नहीं किया है। सरकार ने आगे की कार्रवाई को पुलिस जांच के नतीजों पर छोड़ दिया है।
देखा जाये तो कर्नाटक की इस सियासी उठापटक में सबसे अहम सवाल यही है कि कथित स्टिंग ऑपरेशनों के पीछे कौन है, उन्हें वित्तीय मदद कौन दे रहा है और इनका राजनीतिक लाभ किसे मिलना है? साथ ही यह विवाद कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। एक तरफ उसे अपने नेताओं की प्रतिष्ठा और सरकार की विश्वसनीयता बचानी है, दूसरी तरफ पार्टी के भीतर भरोसे और नेतृत्व के संतुलन को बनाए रखना है।
बहरहाल, कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन केवल कैमरे में कैद बातचीत का मामला नहीं रह गया है। यह सत्ता, संगठन, नेतृत्व और राजनीतिक दबाव की लड़ाई का केंद्र बन चुका है। जब तक जांच यह स्पष्ट नहीं करती कि कैमरे किसके इशारे पर चल रहे थे और उनका असली निशाना कौन था, तब तक कर्नाटक की सियासत में यह सवाल गूंजता रहेगा कि स्टिंग का खेल कौन खेल रहा है और आखिर किसकी कुर्सी पर उसकी नजर है?