By एकता | Oct 15, 2026
मौसम बदलने पर घुटनों, कंधों या कमर में दर्द और अकड़न बढ़ना आम बात है। कई लोगों को ठंड बढ़ने या हवा में नमी ज्यादा होने पर जोड़ों का दर्द पहले से ज्यादा महसूस होता है। हालांकि, ठंड या नमी से गठिया नहीं होता, लेकिन मौसम में बदलाव से पहले से मौजूद हड्डियों और जोड़ों की समस्या का दर्द और अकड़न बढ़ सकती है।
तापमान में बदलाव, कम शारीरिक गतिविधि, रोजमर्रा की दिनचर्या में बदलाव और मांसपेशियों में होने वाले बदलाव जोड़ों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। मौसम बदलने का सबसे साफ असर जोड़ों में अकड़न के रूप में दिख सकता है।
ठंड में लंबे समय तक बैठे या बिना ज्यादा हिले-डुले रहने पर मांसपेशियां और शरीर के आसपास के नरम हिस्से ज्यादा खिंचे हुए महसूस हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से घुटनों में घिसाव या जोड़ों से जुड़ी दूसरी परेशानी है, उनमें यह समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसे में कुर्सी से उठना, सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक चलना भी मुश्किल लग सकता है।
हवा के दबाव में बदलाव को भी कई बार जोड़ों के बढ़ते दर्द से जोड़ा जाता है। गठिया से परेशान कुछ लोगों का कहना है कि मौसम बदलने से पहले उन्हें जोड़ों में दर्द या अकड़न महसूस होने लगती है। हालांकि, मौसम के दबाव में बदलाव और जोड़ों के दर्द के बीच ऐसा संबंध क्यों है, इसका सही कारण अभी पूरी तरह साफ नहीं है। इस पर अभी भी शोध किया जा रहा है। लेकिन एक बात साफ है कि मौसम बदलने से दर्द या अकड़न बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मौसम की वजह से गठिया होता है या बीमारी बढ़ती है।
मौसम का असर सिर्फ ठंड या हवा के दबाव तक सीमित नहीं है। बहुत ठंड, ज्यादा गर्मी या बारिश के दौरान लोग घर के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं और पहले के मुकाबले कम चलते-फिरते हैं। लंबे समय तक कम चलने-फिरने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, शरीर का लचीलापन कम हो सकता है और जोड़ों में अकड़न बढ़ सकती है। इसका असर खासतौर पर घुटनों, कूल्हों और रीढ़ जैसे हिस्सों पर पड़ सकता है, जिन पर हमारे शरीर का वजन रहता है। इन हिस्सों को मजबूत रखने के लिए आसपास की मांसपेशियों का मजबूत होना जरूरी है।
मौसम बदलने पर जोड़ों में दर्द होने पर पूरी तरह से चलना-फिरना बंद कर देना सही तरीका नहीं है। इसके बजाय मौसम और अपनी परेशानी के हिसाब से एक्सरसाइज करनी चाहिए। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले हल्का वार्म-अप करने से मांसपेशियों और जोड़ों को तैयार करने में मदद मिल सकती है। पैदल चलना, एक ही जगह रखी जाने वाली साइकिल चलाना, हल्की स्ट्रेचिंग और दूसरे हल्के व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं। अगर पहले से जोड़ों की समस्या है, तो लंबे समय तक आराम करने के बाद अचानक बहुत ज्यादा या मुश्किल एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए। एक्सरसाइज का टाइम धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए।
हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में खान-पान की भी अहम भूमिका है। शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन डी और दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलने चाहिए। कुछ मौसमों में धूप कम मिलने के कारण कुछ लोगों में विटामिन डी की कमी हो सकती है। हालांकि, बिना अपनी जरूरत और पोषण की स्थिति जाने खुद से विटामिन डी की गोलियां या सप्लीमेंट लेना सही नहीं है।
सबसे जरूरी बात यह है कि लंबे समय से बने हुए दर्द को सिर्फ मौसम की वजह न मानें। अगर जोड़ों में ज्यादा सूजन है, सुबह उठने के बाद लंबे समय तक अकड़न रहती है, चलने-फिरने में परेशानी होती है, जोड़ कमजोर या अस्थिर महसूस होता है या दर्द की वजह से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इन लक्षणों के पीछे कोई दूसरी बीमारी या जोड़ों से जुड़ी समस्या हो सकती है, जिसके लिए सही इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
मौसम हमारे जोड़ों में होने वाले दर्द को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हड्डियों और जोड़ों की सेहत तय करने वाली सबसे बड़ी वजह मौसम नहीं है। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना, मांसपेशियों को मजबूत रखना, संतुलित खान-पान लेना और लंबे समय से बनी परेशानी को समय पर डॉक्टर को दिखाना ज्यादा जरूरी है। मौसम और जोड़ों के दर्द से जुड़े इस भ्रम को समझने से लोग उन आदतों पर ध्यान दे सकते हैं, जो लंबे समय तक हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं।