By नीरज कुमार दुबे | Oct 15, 2026
केंद्र की मोदी सरकार देश से घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। अब इस मुहिम में आम नागरिक भी सरकार की मदद कर सकेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए विशेष पोर्टल शुरू किया है, जहां अवैध घुसपैठ और संदिग्ध बसावट से जुड़ी जानकारी साझा की जा सकती है। यानी अगर आपके आसपास किसी व्यक्ति के अवैध रूप से भारत में रहने की विश्वसनीय जानकारी है, तो आप सरकार को इसकी सूचना दे सकते हैं। मोदी सरकार की इस पहल का मकसद घुसपैठियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पोर्टल केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, संस्थानों और आम नागरिकों के लिए खुला है। यहां उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारियों के आधार पर समिति अवैध अप्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक स्थायी, व्यवस्थित, कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध व्यवस्था बनाने की सिफारिश करेगी। यानी अब जोर केवल समस्या की पहचान पर नहीं, बल्कि उससे निपटने के लिए एक संस्थागत तंत्र तैयार करने पर भी है।
हम आपको याद दिला दें कि इस समिति का गठन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को किया था। इसकी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को घोषित हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, समिति को देश में अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाले असामान्य जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके दायरे में प्रजनन दर में अंतर, सीमा पार आवागमन, आर्थिक अवसरों, सामाजिक-पर्यावरणीय परिस्थितियों और असामान्य बसावट के पैटर्न जैसे पहलू शामिल हैं।
समिति का काम केवल आंकड़े इकट्ठा करना नहीं है। उसे यह भी देखना है कि किन क्षेत्रों में जनसंख्या का स्वरूप बदल रहा है, इन परिवर्तनों के पीछे कौन-से कारक हैं और सीमा प्रबंधन तथा पहचान प्रणालियों को किस प्रकार मजबूत किया जा सकता है। धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या संबंधी बदलावों का अध्ययन भी उसके कार्यक्षेत्र में रखा गया है।
देखा जाये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतिगत प्राथमिकताओं में अवैध घुसपैठ का मुद्दा लगातार प्रमुखता से उभरा है। मई 2026 में उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा के दौरान शाह ने अवैध घुसपैठ से पैदा होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों को देश के वर्तमान और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बताया था। गृह मंत्रालय के अनुसार, समिति को अपनी रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर देनी है; जरूरत पड़ने पर इसका कार्यकाल छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
हम आपको याद दिला दें कि अगस्त 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने भारत को कम समय में घुसपैठिया मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया था। इससे पहले फरवरी 2026 में दिल्ली पुलिस के स्थापना दिवस समारोह में उन्होंने 2029 से पहले सीमा प्रबंधन के आधुनिकीकरण और भारत को घुसपैठिया मुक्त बनाने को केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया था। इन बयानों से स्पष्ट है कि मोदी सरकार इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित रखने के बजाय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है।
हम आपको बता दें कि नई समिति को सीमा प्रबंधन मजबूत करने, पहचान प्रणालियों को बेहतर बनाने और केंद्र तथा राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के उपाय सुझाने हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा पार अवैध प्रवेश की रोकथाम, देश के भीतर पहचान का सत्यापन और निर्वासन की प्रक्रिया अलग-अलग प्रशासनिक चुनौतियां हैं। इनके प्रभावी समाधान के लिए केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस, स्थानीय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के बीच तालमेल आवश्यक होगा। देखा जाये तो नया पोर्टल इस प्रक्रिया में सूचनाओं के संग्रह और विश्लेषण का माध्यम बन सकता है।
14 अक्टूबर को पोर्टल के शुभारंभ के साथ मोदी सरकार ने इस विषय पर संस्थागत स्तर पर जानकारी जुटाने का नया रास्ता खोला है। अब देखना होगा कि राज्यों और नागरिकों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर समिति क्या निष्कर्ष निकालती है और अवैध घुसपैठ की पहचान तथा निर्वासन के लिए किस प्रकार की स्थायी व्यवस्था प्रस्तावित करती है।
वैसे भी बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या आबादी से जुड़ा सवाल अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है। असम से झारखंड और पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों तथा छोटे कस्बों तक अवैध प्रवास और संदिग्ध पहचान के मामलों की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम चुनौती है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासनकाल के दौरान भाजपा लगातार आरोप लगाती रही कि तृणमूल कांग्रेस सरकार की नीतियों और वोट-बैंक राजनीति ने घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाने के प्रयासों को कमजोर किया, जबकि अमित शाह ने भी राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया था। यही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ समय पहले देश के सीमाई क्षेत्रों का दौरा कर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निगरानी और मजबूत करने के निर्देश दिए थे। मोदी सरकार की स्मार्ट बॉर्डर योजना के तहत निगरानी तकनीक, सीमा सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने, अवैध घुसपैठ रोकने और लंबित सीमा-संबंधी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी जोर दिया था। साफ है कि सरकार का जोर केवल घुसपैठ के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ के रास्तों को ही बंद करने पर है।
बहरहाल, मोदी सरकार ने ‘घुसपैठिया मुक्त भारत’ के लक्ष्य की ओर अपने कदम तेजी से आगे बढ़ा दिए हैं। घुसपैठ पर लगाम कसने से लेकर अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके निर्वासन की व्यवस्था मजबूत करने तक, सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी है। अब इस मुहिम में नागरिकों की भागीदारी भी अहम होगी। यदि आपके पास अवैध घुसपैठ से जुड़ी कोई विश्वसनीय जानकारी है, तो उसे सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर साझा करें। देश की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प का विषय है। सरकार की सख्ती, नागरिकों की सतर्कता और कानून के प्रभावी पालन का तालमेल ही इस अभियान को मजबूती दे सकता है।
-नीरज कुमार दुबे