By एकता | Oct 20, 2026
फ्रांस में महंगाई, स्कूली शिक्षा के गिरते स्तर और खराब आर्थिक हालत के खिलाफ शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब हिंसक हो गए हैं। हालात को संभालने के लिए कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया है और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में हुई हिंसा के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की इमिग्रेशन पॉलिसी को जिम्मेदार बताया है।
ट्रंप ने दावा किया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बनने जा रहा है और यह कोई समझौता नहीं था। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में प्रवासियों के आने से फ्रांस की राजधानी की आबादी का ढांचा काफी बदल गया है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मैक्रों को कई साल पहले ही बड़ी संख्या में प्रवासियों को फ्रांस में आने की अनुमति नहीं देने की चेतावनी दी थी।
फ्रांस के पेरिस, मार्सेली और लिमोगेस जैसे बड़े शहरों में नकाब पहने लोगों ने नगर भवन, सरकारी इमारतों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट की है। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, अब तक करीब 1,000 पुलिसकर्मी और दमकलकर्मी घायल हुए हैं। हिंसा पर काबू पाने के लिए देशभर में कर्फ्यू लगाया गया है और 2,400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, "विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार के नाम पर की जा रही बर्बरता और अराजकता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" मैक्रों ने सुरक्षा समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है। उन्होंने साफ कहा है कि हिंसा करने वालों के खिलाफ सरकार कोई रियायत नहीं देगी।