US-Israel-Iran War | ईरान को Donald Trump की 'डेडलाइन', बुधवार तक समझौता नहीं, तो फिर शुरू होगी बमबारी

By रेनू तिवारी | Apr 18, 2026

मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शुक्रवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि बुधवार तक दोनों देशों के बीच किसी "बड़े समझौते" पर सहमति नहीं बनी, तो वर्तमान में लागू सीज़फ़ायर (युद्धविराम) को खत्म कर दिया जाएगा। खाड़ी क्षेत्र में लगातार तनाव के बीच यह संकेत मिला है कि सैन्य टकराव फिर से बढ़ सकता है।

हालांकि, पर्दे के पीछे से हो रही बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी कई अहम मुद्दों पर बंटे हुए हैं। इन मुद्दों में प्रतिबंधों में ढील, परमाणु समझौते से जुड़ी प्रतिबद्धताएँ और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं।

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हॉरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास चल रहे तनाव ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। यह एक बेहद अहम वैश्विक ऊर्जा गलियारा है, जहाँ से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की शिपमेंट होती है।

हालांकि वॉशिंगटन का कहना है कि यह जलमार्ग "खुला" है और जहाज़ों के आने-जाने के लिए सुरक्षित है, लेकिन तेहरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर US का दबाव जारी रहा, तो इस रास्ते तक पहुँच को सीमित किया जा सकता है। US ने अप्रैल के मध्य से ही ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाते हुए एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर रखी है, जिसका मकसद तेहरान से जुड़ी समुद्री गतिविधियों को रोकना है।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इस नाकाबंदी के तहत, ईरानी बंदरगाहों में घुसने या वहाँ से निकलने की कोशिश करने वाले जहाज़ों को वापस भेज दिया गया है। हालांकि, ईरान ने इस कदम को गैर-कानूनी और भड़काऊ बताया है।

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ईरानी नेताओं ने भी हॉरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति और व्यापक बातचीत को लेकर US के दावों का कड़ा विरोध किया है। तेहरान के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर यह नाकाबंदी जारी रहती है, तो इसका सीधा असर हॉरमुज़ के रास्ते होने वाली जहाज़ों की आवाजाही पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाज़ारों में चिंता बढ़ गई है, जो पहले से ही आपूर्ति में रुकावटों को लेकर काफी संवेदनशील हैं।

ट्रंप की ये ताज़ा टिप्पणियाँ दोनों पक्षों के बीच बढ़ती खाई को उजागर करती हैं, भले ही दोनों ही पक्ष सार्वजनिक तौर पर किसी समझौते के लिए तैयार होने का संकेत दे रहे हों। US के राष्ट्रपति ने बार-बार किसी समझौते पर पहुँचने को लेकर उम्मीद जताई है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत नाकाम होती है, तो इसके सैन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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