By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के खिलाफ दायर 10 अरब अमेरिकी डॉलर के मानहानि मामले में 11 दिसंबर तक बयान दर्ज कराने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया। ‘यूएस मजिस्ट्रेट जज’ एंजोलिक लेट ने यह आदेश दिया। दरअसल, बीबीसी के वकीलों ने शिकायत की है कि ट्रंप अपने ही द्वारा दायर मुकदमे में बयान दर्ज कराने में देरी कर रहे हैं।
न्यायाधीश ने न्याय विभाग को दो नवंबर तक उनके अनुरोध पर जवाब देने का आदेश दिया। ट्रंप का बयान दर्ज कराने के मामले पर सुनवाई के दौरान टोबिन ने बताया कि इसके लिए पहले 16 अक्टूबर की तारीख पर सहमति बनी थी, लेकिन ट्रंप ने ‘‘राष्ट्रीय महत्व के एक मामले’’ का हवाला देकर इसे स्थगित कर दिया था। टोबिन ने कहा कि वास्तव में रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं राष्ट्रपति ट्रंप उस दिन जॉर्जिया में चुनाव प्रचार कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘वह पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे और उन्होंने बयान दर्ज कराने के बजाय उसे प्राथमिकता दी।’’ न्यायाधीश लेट ने कहा कि ट्रंप को 11 दिसंबर तक अपना बयान दर्ज कराना होगा और ऐसा नहीं करने पर मुकदमा खारिज किया जा सकता है। हालांकि, यदि मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश सबूत जुटाने की अवधि बढ़ा देते हैं, तो यह समयसीमा बदल सकती है। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच दस्तावेजों और अन्य सबूतों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया 18 दिसंबर को समाप्त होनी है।
बीबीसी के वकील चाहते हैं कि इससे पहले ट्रंप का बयान दर्ज हो जाए। ट्रंप पहले भी कई बार बयान दर्ज कराने से बचते रहे हैं। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बीबीसी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।
ट्रंप ने सार्वजनिक धन से संचालित इस प्रसारण संस्था पर ‘ट्रंप: ए सेकंड चांस’ नामक वृत्तचित्र को लेकर मानहानि करने के साथ ही भ्रामक और अनुचित व्यापारिक तौर-तरीके अपनाने का आरोप लगाया था।