By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों की उन अपीलों पर 26 अक्टूबर को सुनवाई करने का फैसला किया, जिनमें एकल न्यायाधीश के सीएमआरएल रिश्वत मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गयी है। विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद एवं विधायक पी. ए. मोहम्मद रियास की ओर से दायर अपीलें न्यायमूर्ति सतीश निनान और न्यायमूर्ति पी. कृष्ण कुमार की खंडपीठ के समक्ष आईं। पीठ ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख तय की।
यह अनुरोध कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से कथित तौर पर किए गए भुगतानों की जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ली गई तलाशी के आधार पर किया गया था। मामला दर्ज करने के बजाय राज्य पुलिस ने ईडी की रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक जांच करने का फैसला किया। नौ अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस को सौंपी गई ईडी की रिपोर्ट के आधार पर वीएसीबी को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद दो प्राथमिकी दर्ज की गईं, जिसके बाद ईडी ने विजयन और उनके परिवार के खिलाफ पीएमएलए के तहत अलग-अलग जांच शुरू की। उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को विजयन, वीणा और रियास की उन अर्जियों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जिसने वीएसीबी की जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगाते हुए उन्हें उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर करने का निर्देश दिया।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने ईडी की जांच पर रोक नहीं लगाई है। ईडी ने विजयन को शुक्रवार को पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस जारी किया था। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, विजयन ने एजेंसी को पत्र भेजकर उच्चतम न्यायालय के आदेश और विधानसभा का सत्र जारी होने का हवाला दिया तथा पूछताछ में शामिल होने से असमर्थता जताई।
वीएसीबी की प्राथमिकी के अनुसार, विजयन पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और अपने, अपनी बेटी तथा उसकी कंपनी के लिए अनुचित आर्थिक लाभ हासिल करने के वास्ते भ्रष्ट और अवैध तरीके अपनाए। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि वीणा और उनकी अब बंद हो चुकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को सीएमआरएल तथा एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड से उनके संबंधित बैंक खातों के माध्यम से 3.28 करोड़ रुपये मिले थे। आरोप है कि यह रकम सूचना प्रौद्योगिकी परामर्श और विपणन सेवाओं के भुगतान के नाम पर दी गई थी।