दुनियाभर में दोहरेपन और खोखलेपन की सबसे बड़ी मिसाल हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

By नीरज कुमार दुबे | Oct 10, 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला कर लिंडसे ग्राहम को मानो श्रद्धांजलि दे दी है! यह कटाक्ष इसलिए है, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदे तो उस पर सौ फीसदी टैरिफ लगा दिया जाता है, लेकिन अमेरिका वही काम करे तो उसे शानदार फैसला बताया जाता है। यही नहीं, नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय पर ही प्रतिबंध लगा दिए। आखिर यह कैसी नीति है? दूसरों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले ट्रंप जब अपने देश के हितों की बात आती है, तो उन्हीं नियमों को भूल जाते हैं। भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाने वाले ट्रंप अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे हैं, इस फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है इसलिए सवाल उठ रहा है कि रूस से तेल खरीदना गलत है, या गलत सिर्फ तब है जब भारत खरीदे? यही है ट्रंप की नीति का दोहरापन और खोखलापन!

इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर Norway पर साधा निशाना, 8 युद्ध रुकवाने का किया दावा

गौरतलब है कि यह वही प्रशासन है जिसने रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिबंधों को सख्त करने की नीति अपनाई थी। लेकिन जब अमेरिका में ईंधन की कीमतें बढ़ीं और किसानों, ट्रक चालकों तथा कारोबारियों पर दबाव बढ़ा, तो रूस से ऊर्जा खरीद अचानक स्वीकार्य हो गई। दरअसल अमेरिका में नवंबर की शुरुआत में मध्यावधि चुनाव होने हैं और ट्रंप की नीतियों के चलते वहां महंगाई अप्रत्याशित रूप से बढ़ गयी है जिसके चलते जनता नाराज है।

रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर में अमेरिकी डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गयी थी और शुक्रवार को लगभग 6.28 डॉलर प्रति गैलन रही। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई का सवाल ट्रंप के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है। सर्वेक्षणों के मुताबिक, 78 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने बढ़ती जीवन-यापन लागत के लिए ट्रंप की नीतियों को जिम्मेदार माना है। इसलिए जब अमेरिकी मतदाताओं की जेब का सवाल आया, तो रूस से डीजल खरीदना ट्रंप के लिए राष्ट्रीय हित बन गया। लेकिन भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुसार रूसी तेल खरीदे, तो उसे टैरिफ का सामना करना पड़ता है। इसलिए सवाल उठता है कि यह कैसी निष्पक्षता है? यह कैसी नियम-आधारित व्यवस्था है, जिसमें नियम दूसरों के लिए हैं और छूट अपने लिए?

दूसरी ओर, ट्रंप के इस फैसले ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की नाराजगी भी बढ़ा दी है। उन्होंने इसे अनुचित और बेईमानी भरा कदम बताते हुए कहा कि इससे पुतिन को जन्मदिन का उपहार मिलने जैसा संदेश जाता है। जेलेंस्की की आपत्ति इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि यह घोषणा ऐसे समय हुई, जब ट्रंप के प्रतिनिधि यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ युद्ध समाप्त करने के प्रस्तावों पर बातचीत कर रहे थे।

जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यदि ऊर्जा प्रतिबंधों में ढील दोनों देशों की ओर से सर्दियों में ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने जैसे पारस्परिक समझौते का हिस्सा होती, तो उसका समर्थन किया जा सकता था। लेकिन बिना ऐसी शर्तों के रियायत देना रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक सहारा देने जैसा दिखाई देता है। वहीं अमेरिकी रिपब्लिकन नेता डॉन बेकन ने भी इस फैसले की आलोचना की। उनका तर्क था कि अमेरिकी किसानों और उपभोक्ताओं के लिए डीजल सस्ता करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए रूस से ईंधन खरीदना गलत रास्ता है। उन्होंने पूछा कि जब अमेरिकी संसद ने रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कानून पारित किया और ट्रंप ने स्वयं उस पर हस्ताक्षर किए, तो अब उसी दबाव को कमजोर करने का औचित्य क्या है?

इसके अलावा, ट्रंप की राजनीति का दूसरा चिंताजनक पहलू अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रति उनका रवैया है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप प्रशासन ने न्यायालय के विरुद्ध प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। नवी पिल्लै को सम्मान ऐसे समय मिला, जब अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ने को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं। नोबेल समिति ने युद्ध अपराधियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों को न्याय दिलाने वाली अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को शांतिपूर्ण विश्व की अनिवार्य शर्त बताया। नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलते ही ट्रंप जैसे बौखला गये और कुछ घंटों बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी नागरिकों पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय का अभियोजन स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिकी प्रशासन ने न्यायालय के साथ लेन-देन पर रोक लगाने और उसके संसाधनों को बाधित करने की मंशा जाहिर की। वहीं अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने इसे कानून के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था की बुनियाद पर हमला बताया।

देखा जाये तो यहां भी वही पुराना सवाल सामने आता है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कानून केवल कमजोर देशों और विरोधियों पर लागू होना चाहिए? क्या अमेरिका को अपने नागरिकों और अधिकारियों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से ऊपर रखने का अधिकार मिल जाना चाहिए? ऐसा लगता है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की सीमाएं अपने हिसाब से तय करना चाहता है। ट्रंप की राजनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि वे राष्ट्रीय हित का इस्तेमाल कभी प्रतिबंधों को उचित ठहराने के लिए करते हैं, तो कभी उन्हीं प्रतिबंधों को कमजोर करने के लिए। भारत के लिए रूसी तेल आर्थिक और ऊर्जा संबंधी जरूरतों का प्रश्न है, लेकिन अमेरिका के लिए वही रूसी ऊर्जा घरेलू महंगाई घटाने और चुनावी नुकसान रोकने का साधन बन जाती है।

इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय न्याय की बात तब तक स्वीकार्य दिखाई देती है, जब तक वह अमेरिकी सत्ता और उसके सहयोगियों के हितों से न टकराए। जैसे ही जवाबदेही का सवाल उठता है, स्वतंत्र न्यायिक संस्था को ही निशाना बनाया जाने लगता है। यह केवल नीतिगत असंगति नहीं, बल्कि उस नैतिक दावे की कमजोरी है जिसके आधार पर अमेरिका दुनिया को नियमों, लोकतंत्र और न्याय का उपदेश देता रहा है। ट्रंप ने अपने फैसलों से यह धारणा मजबूत की है कि उनके लिए सिद्धांत स्थायी नहीं, बल्कि परिस्थितियों और राजनीतिक लाभ के अनुसार बदलने वाली चीज हैं।

बहरहाल, ट्रंप चाहे अपने कदमों को अमेरिकी हितों की रक्षा बताएं, लेकिन जब वही कदम दूसरों पर थोपे गए नैतिक मानदंडों को ध्वस्त करते हैं, तो उनकी राजनीति का खोखलापन उजागर होता है। अमेरिका को रूसी डीजल और भारत पर सौ फीसदी टैरिफ, इससे बड़ा दोहरा मापदंड क्या होगा? साथ ही अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पर प्रतिबंध लगाकर यदि कोई देश खुद को कानून से ऊपर समझने लगे, तो दुनिया उसे न्याय का संरक्षक नहीं, बल्कि अपने स्वार्थ का प्रहरी ही मानेगी।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

4,00,000,00,00,000 से अधिक पैसे निकाले गए, विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से क्यों हो रहा मोहभंग, तुरंत क्या कदम उठाने की जरूरत?

New Delhi में कॉजपा के विरोध प्रदर्शन से पहले जंतर-मंतर पर कड़ा सुरक्षा पहरा

Prabhasakshi NewsRoom: Abhijeet Dipke, Saurav Das, Ashutosh Ranka और Dhruv Rathee की खुद को Safe रखने वाली रणनीति सफल रही

Rise & Fall 2 | तेज प्रताप यादव का बड़ा खुलासा, कहा- शादी के 3 महीने के भीतर ही पूर्व पत्नी को एक्स-बॉयफ्रेंड को लव यू मैसेज करते देखा था