By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 26, 2022
नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत वर्मा का मानना है कि मुद्रास्फीति पर अचानक काबू पाने के लिए वृद्धि का असहनीय बलिदान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पीटीआई-को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के प्रकोप से मुश्किल से ही उबर पाई है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मुद्रास्फीति पर ‘‘अचानक’’ काबू पाने की कोशिश में ‘‘वृद्धि का असहनीय बलिदान’’ न हो।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल से महामारी से उबर पाई है, और हमें इस बात से सावधान रहना होगा कि मुद्रास्फीति पर अचानक काबू पाने की कोशिश में वृद्धि का असहनीय बलिदान न हो।’’ आईआईएम अहमदाबाद में वित्त और लेखा के प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि वह इस समय मुद्रास्फीति के जोखिमों को संतुलित मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय स्थितियां विश्व स्तर पर और घरेलू स्तर पर सख्त हो गई हैं, और इससे मांग-पक्ष के दबाव उभर रहे हैं।’’
वर्मा के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है और दुनिया को उच्च वृद्धि के रास्ते पर वापस आने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने आगे कहा, ‘‘लेकिन इस निराशाजनक संदर्भ में, मैं आज भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में सतर्क रूप से आशावादी हूं... यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न झटकों के बावजूद भारत में आर्थिक सुधार लचीला रहा है। वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए वृद्धि के पूर्वानुमान तार्किक हैं।’’ आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर बरकरार रखा है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी को लेकर आगाह भी किया है।