By अभिनय आकाश | Jan 05, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कई मंचों पर यह कह रहे हैं कि अब ग्रीनलैंड की बारी है क्योंकि उन्हें ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए चाहिए। अमेरिका की सुरक्षा के नाम पर वो चीन और रूस का भी नाम लेते हैं और कहते हैं कि कभी भी यह हमारे घर पर दस्तक दे सकते हैं। ऐसे में हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है। हम उसे लेकर रहेंगे। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी है जो वह बार-बार ग्रीनलैंड को लेकर दे रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी भरे लहजे में कह रहे हैं कि आप हमें धमकी देना बंद कर दें।
डेनिश प्राइम मिनिस्टर मेठे ने सीधे तौर पर अमेरिका से यह कहा है कि अमेरिका का बार-बार यह कहना कि उसे ग्रीनलैंड चाहिए इसका कोई मतलब नहीं है। अमेरिका के पास डेनिश किंगडम से किसी भी देश को काटने का कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा वह यह भी कहती हैं कि जो किंगडम ऑफ डेनमार्क है और जो ग्रीनलैंड उसका पार्ट है वह नेटो का हिस्सा है और नाटो के सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की भी है। ऐसे में अमेरिका कोई भी मनचाहा कदम नहीं उठा सकता और हम भी इस पैक्ट का हिस्सा हैं और हमने भी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अपनी खूब जिम्मेदारी का निर्वाहन किया है।
वहीं ग्रीनलैंडिंग प्राइम मिनिस्टर की तरफ से भी यह कहा गया है कि हम अमेरिका के सदियों से बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। हमने कंधे से कंधे मिलाकर बुरे वक्त का सामना किया है। हमने नॉर्थ अटलांटिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाई है। यही सच्चे दोस्त करते हैं। ऐसे में उनका यह कहना है कि बार-बार अमेरिका की तरफ से इस तरह की धमकी देना नाकाबिले बर्दाश्त है और इसे आगे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार यह कहते हैं कि वी नीड ग्रीनलैंड तो यह साफ तौर पर बताता है कि वह हमें वेनेजुएला और अपनी सेना की तरह इंटरवीन करना चाहते हैं जो कि गलत नहीं है बल्कि अपमानजनक भी है।
जाहिर तौर पर अमेरिका के वेनेजुएला में किए गए ऑपरेशन के बाद दुनिया में उथल-पुथल मच गई है। क्योंकि हर कोई अब इस तरफ नजरें गड़ाए बैठा है कि अमेरिका अगला कदम कंबोडिया की तरफ चलेगा या फिर वह क्यूबा की तरफ कदम बढ़ाएगा या फिर ग्रीनलैंड की तरफ।