Gold Price पर दोहरी मार: Profit Booking और US संकेतों से 1.50 लाख के नीचे फिसला सोना

By Ankit Jaiswal | Jun 10, 2026

सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। बुधवार को घरेलू बाजार में सोने के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए 1.50 लाख रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मुनाफावसूली और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने इस गिरावट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गौरतलब है कि यदि अमेरिका में महंगाई अपेक्षा से अधिक बनी रहती है तो वहां ब्याज दरों में कटौती की संभावना और आगे खिसक सकती है। ऐसी स्थिति में सोने जैसी संपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि कई निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया है।

बता दें कि 13 मई को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला था। उस समय सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़कर 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थीं। हालांकि उसके बाद बाजार में लगातार सुधार देखने को मिला और अब कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 9 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी हैं।

वस्तु और मुद्रा बाजार के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद आई तेजी मुख्य रूप से घरेलू लागत बढ़ने का असर थी। यह तेजी किसी नए दीर्घकालिक उछाल का संकेत नहीं थी। अब बाजार का ध्यान फिर से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों पर केंद्रित हो गया है।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 11 मई 2026 को सोने का हाजिर भाव 1,49,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इसके बाद पहली बार कीमतें फिर से 1.50 लाख रुपये के नीचे पहुंची हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर सोने के लिए महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर मजबूत बाधा बना हुआ है। जब तक कीमतें इस स्तर के ऊपर नहीं निकलती हैं, तब तक बाजार की धारणा कमजोर बनी रह सकती है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिकी मुद्रा मजबूत हुई है। इसके पीछे अमेरिका की अपेक्षा से बेहतर आर्थिक स्थिति और मजबूत आंकड़े प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। मजबूत अमेरिकी मुद्रा और ऊंची प्रतिफल दरों वाले ऋण पत्रों ने सोने की मांग को कुछ हद तक प्रभावित किया है। क्योंकि सोना नियमित आय देने वाली संपत्ति नहीं माना जाता है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में इसकी आकर्षण क्षमता कम हो जाती है।

वस्तु बाजार विशेषज्ञ हरीश वी का मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकती है। उनके अनुसार निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।

फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी हुई है। यदि आंकड़े अपेक्षा से अधिक आते हैं तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है। वहीं यदि महंगाई नियंत्रित दिखाई देती है तो कीमतों में फिर से स्थिरता लौटने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद की जा रही है।

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