By Ankit Jaiswal | Apr 15, 2026
मार्च 2026 में थोक महंगाई दर में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे आर्थिक मोर्चे पर नई चिंताएं सामने आई हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक थोक महंगाई दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तीन साल से ज्यादा का उच्च स्तर माना जा रहा है। फरवरी में यह दर 2.13 प्रतिशत थी।
गौरतलब है कि विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर भी बढ़कर 3.39 प्रतिशत हो गई, जिससे यह साफ है कि लागत का दबाव धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। हालांकि खाद्य महंगाई अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही और 1.85 प्रतिशत पर टिकी रही, जिससे खाने-पीने की चीजों में बड़ी उथल-पुथल नहीं दिखी।
अगर रोजमर्रा की चीजों की बात करें तो सब्जियों और अनाज की कीमतों में अलग-अलग रुख देखने को मिला। आलू और प्याज की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही, जबकि दूध की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। दालों में भी गिरावट की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।
बता दें कि खुदरा महंगाई दर भी मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो फरवरी में 3.21 प्रतिशत थी। यह संकेत देता है कि वैश्विक हालात का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति में बाधा की आशंका ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ उठाए गए कदमों और समुद्री मार्गों पर बढ़ती गतिविधियों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे हालात में भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए महंगाई का जोखिम और बढ़ जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी माना है कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन बाहरी झटकों का असर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक के अनुसार आने वाले समय में महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता अभी बनी हुई है।
मार्च के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि फिलहाल महंगाई पर नियंत्रण बना हुआ है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतें आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाली हैं। ऐसे में सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों के लिए संतुलन बनाकर चलना बड़ी चुनौती बनी हुई है।