By अभिनय आकाश | Jul 24, 2026
एक तरफ डीआरडीओ ने स्वदेशी कुशा मिसाइल का सफल परीक्षण किया तो इसके साथ ही एक और बड़ा धमाका था जो डीआरडीओ ने किया और वो था स्वदेशी जेट इंजन तकनीक को तैयार करना। इसके बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो चुका है जिनके पास खुद जेट इंजन की तकनीक मौजूद है। डीआरडीओ ने देश के पहले 350 किग्र थ्रस्ट क्लास का स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन तैयार कर लिया है। यह सिर्फ एक इंजन नहीं है बल्कि भारत की तकनीकी ताकत, आत्मनिर्भरता भविष्य की सैन्य शक्ति का नया प्रतीक है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया है डीआरडीओ की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट यानी कि जीटीआरई ने। इस इंजन का निर्माण और असेंबली हैदराबाद की आजाद इंजीनियरिंग के सहयोग से किया गया है।
इससे देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूती मिलेगी। साथ ही में भविष्य में जो स्वदेशी मिसाइल्स और ड्रोन कार्यक्रम आएंगे उनको नई ताकत मिलेगी। इस इंजन को आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ राकेश चौपदार ने डीआरडीओ की डिस्टिंग्विश साइंटिस्ट एवं डायरेक्टर जनरल एरोनॉटिकल सिस्टम डॉ के राजक्ष्मी मेनन को और जीटीआरए के डायरेक्टर डॉ एस वी रामना मूर्ति को औपचारिक रूप से सौंपा है। इस मौके पर रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने जीटीआर और भारतीय उद्योग की साझेदारी की जमकर सराहना की है और इसे भारत की रक्षा इतिहास का ऐतिहासिक मेल का पत्थर बताया है। यह उपलब्धि केवल एक इंजन बनाने की सफलता नहीं है बल्कि ये दुनिया को एक संदेश है कि भारत अब रक्षा तकनीक के सबसे कठिन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ चुका है।