Lalu Prasad Yadav Birthday: कांस्टेबल बनने का था सपना, कैसे Indian Politics के 'किंगमेकर' बने लालू यादव

By अनन्या मिश्रा | Jun 11, 2026

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आज यानी की 11 जून को अपना 78वां जन्मदिन मना रही हैं। सत्ता हो या विपक्ष हो दशकों तक लालू प्रसाद यादव धुरी रहे। राज्य की राजनीति हो या फिर केंद्र की, लालू यादव के बिना किसी भी समीकरण या गठबंधन का बनाना आसान नहीं होता है। हालांकि इस बात की जानकारी बहुत कम लोगों को है कि राजनीति के इस धुरंधर की शुरूआत इतनी साधारण थी कि उन्होंने शायद खुद भी कभी नहीं सोचा था कि वह एक दिन देश की राजनीति में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर लालू प्रसाद यादव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

सियासत में एंट्री

लालू यादव ने पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव बने। इस तरह से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की पहली सीढ़ी पर कदम रखा था। जिसके बाद साल 1973 में पटना यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बने। इस दौरान जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के खिलाफ बिगूल फूंका। जेपी आंदोलन के साथ जुड़कर लालू यादव जेल गए औऱ यहीं से उनकी राजनीति चमकी। साल 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और 29 साल की उम्र में सांसद बने।

आडवाणी को गिरफ्तार करवाया

साल 1990 में देश में अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा काफी जोरों पर था। उस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली। जब आडवाणी रथयात्रा लेकर बिहार पहुंचे तो तब तक लालू यादव ने रथयात्रा रोकने की ठान ली। 

वहीं अक्तूबर को बिहार के समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। जिसके बाद देश की सियासत में खलबली मच गई। बीजेपी ने केंद्र की वीपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई। लेकिन इसके बाद लालू यादव एक ताकतवर नेता के रूप में उभरे।

सीएम बने

मार्च 1990 में लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस दौरान उन्होंने तीन अहम फैसले लिए थे। जिनमें उन्होंने ताड़ी की बिक्री पर लगे कर और उपकर को हटा दिया था। लालू यादव ने करीब 150 चरवाहा विद्यालय खुलवाए, जिसमें चरवाहे मवेशी को चराते समय पढ़ाई कर सकें। इसके अलावा उन्होंने खेतिहर मजदूरों का न्यूनतम पारिश्रमिक को 16.50 से बढ़ाकर 21.50 रुपए कर दिया था।

लालू यादव पर चारा घोटाले का आरोप लगा और उनको 25 जुलाई 1997 में सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह लालू यादव के लिए टर्निंग प्वाइंट था। इसके बाद राबड़ी देवी बिहार की अगली मुख्यमंत्री बनी थीं। वहीं 05 जुलाई 1997 को लालू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया था।

रेल मंत्री

जब लालू यादव ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। तो उनके प्रबंधन का डंका देश-विदेश तक बजा। लालू यादव के प्रबंधन की तारीफ चारों ओर हुई। लोग लालू यादव के प्रबंधन के कौशल का लोहा मानने लगे। यही कारण है कि साल 2004 में उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद में स्टूडेंट्स को प्रबंधन का गुर सिखाया।

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