By अभिनय आकाश | Oct 03, 2026
रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों खासतौर पर नाटो देशों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर बाल्टिक क्षेत्र में स्थित रूसी इलाके कालिनीनग्राद पर सीधे हमला होता है तो मॉस्को परमाणु बम समेत अपने सभी किस्म के हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। पुतिन ने एक घंटे के अंदर दूसरी बार ऐसी चेतावनी दी है। इसने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है कि क्या रूस यूक्रेन जंग में परमाणु बम का इस्तेमाल हो सकता है? दरअसल पुतिन का यह बयान तब आया है जब मॉस्को नाटो को एक राजनिक चेतावनी भेजी है। रूस का कहना है कि नाटो की तरफ से कालिनीनग्राद को अलग-थलग करने या फिर उसकी घेराबंदी करने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि नेटो ने इस बात को खारिज कर दिया है कि वह रूसी इलाके के लिए खतरा है। नाटो ने मॉस्को की परमाणु हथियारों से जुड़ी बयानबाजी की भी आलोचना की है। यूक्रेन युद्ध के बीच नेटो और रूस के रिश्तों में पहले से ही ज्यादा तनाव है और इस नए घटनाक्रम ने इसे और बढ़ा दिया है। मॉस्को में बोलते हुए रूसी नेता ने कहा कि उनका किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन जरूरत पड़ने पर वे पश्चिमी देशों की आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने नेटो सदस्य देशों पोलैंड और लिथवानिया के बीच घेरे रूसी इलाके कालिनी नगरात का भी जिक्र किया।
दुनिया के नक्शे को देखें तो रूस के पश्चिम इलाके में स्थित बाल्टिक सागर के किनारे बसा कालिनीनग्राद रूस का एक छोटा इलाका है जो नेटो देशों से घिरा हुआ है। इसके एक तरफ पोलैंड है और दूसरी तरफ लिथुआ है। वैसे तो यह रूस का हिस्सा है लेकिन रूसी जमीन से बिल्कुल अलग-थलग है। रूस से कालिनीनग्राद जाने के लिए दो-तीन देशों की सीमाओं को पार करना पड़ता है। इसे रूस का एक्सक्लेव कहा जाता है। यानी ऐसा इलाका जो देश के मुख्य हिस्से से दूर किसी दूसरे देश की सीमा में स्थित हो। यही रूस के लिए कमजोरी है। लेकिन इसका अहम रणनीतिक महत्व भी है। साल के 365 दिन बर्फ से मुक्त रहने के कारण बाल्टिक सागर के किनारे स्थित इस इलाके में रूसी नौसैनिक बेड़े का मुख्य अड्डा है। इतना ही नहीं यह इलाका रूस के लिए एक सैनिक किले की तरह भी है। जहां से रूस सीधे बर्लिन, वारसो, कोपेनहेगन और स्टॉकहोम जैसे बड़े यूरोपीय शहरों को सेकंडों में निशाना बना सकता है। यही रणनीतिक वजह है कि नेटो देश रूस से खौफ खाते हैं। यूक्रेन और रूस का युद्ध अब अपने पांचवें साल में है। लेकिन पुतिन हमले को धीमा करने का कोई संकेत नहीं दे रहे हैं।