खराब मौसम की वजह से Tatanagar नहीं पहुंच सकें PM Modi, रांची से वंदे भारत ट्रेन को वर्चुअली दिखाई हरी झंडी

By एकता | Sep 15, 2024

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रांची से डिजिटल माध्मय से छह वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। ये नई वंदे भारत ट्रेनें झारखंड, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश में चलेंगी। बता दें, पीएम मोदी झारखंड के टाटानगर से इन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले थे, लेकिन कम दृश्यता और खराब मौसम की वजह से उनका हेलीकॉप्टर रांची से उड़ान नहीं भर सका। इस वजह से उन्होंने यहीं से डिजिटल माध्यम से वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार टाटानगर स्टेशन पर उपस्थित थे।

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पीएम ने आगे कहा कि पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से इस पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन ट्रेनों से कारोबारियों, छात्रों को बहुत लाभ होगा। इससे यहां आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी तेज होंगी। आगे बोलते हुए पीएम ने कहा, 'आज झारखंड भी उन राज्यों में शामिल हो गया है, जहां रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झारखंड के 50 से अधिक रेलवे स्टेशनों का भी कायाकल्प किए जा रहे हैं।'

पीएम मोदी ने जिन छह वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई है वो टाटानगर-पटना, ब्रह्मपुर-टाटानगर, राउरकेला-हावड़ा, देवघर-वाराणसी, भागलपुर-हावड़ा और गया-हावड़ा मार्गों पर चलेंगी। रेल मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, इन ट्रेनों के परिचालन से संपर्क सुविधा, सुरक्षित यात्रा और यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी। इसके अलावा बयान में कहा गया है कि नयी वंदे भारत ट्रेन के संचालन से इनकी संख्या 54 से बढ़कर अब 60 हो जाएगी।

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प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि ये ट्रेन आवागमन के समय को कम करने में मदद करेंगी। इन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से नियमित यात्रियों, पेशेवरों, व्यापारियों और छात्र समुदायों को लाभ होगा। ये रेलगाड़ियां देवघर (झारखंड) में बैद्यनाथ धाम, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में काशी विश्वनाथ मंदिर, कालीघाट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में बेलूर मठ जैसे तीर्थ स्थलों तक आवागमन का समय कम करके क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेंगी। बयान में कहा गया है कि इससे धनबाद में कोयला और खान उद्योग, कोलकाता में जूट उद्योग, दुर्गापुर में लोहा और इस्पात से जुड़े क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।

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