दशहरे पर इन जगहों पर नहीं होता रावण का दहन, भगवान की तरह पूजे जाते हैं

By कंचन सिंह | Oct 07, 2019

दशहरे का त्योहार पूरे देश में बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है और रावण को बुराई का प्रतीक मानते हुए उसका पुतला जलाया जाता है। आमतौर पर रावण को बहुत बुरा माना जाता है, लेकिन हमारे ही देश में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां रावण को बुराई का प्रतीक नहीं माना जाता और न ही दशहरे के दिन उसका पुतला जलाया जाता है, बल्कि इन जगहों पर तो रावण की पूजा की जाती है।

राजस्थान के जोधपुर में रावण का मंदिर है। यहां एक खास समाज के लोग रावण की पूजा करते हैं और खुद को उसका वंशज मानते हैं। ये लोग दशहरे के लदिन रावण का पुतला जलाने की बजाय उसकी पूजा करते हैं।

मध्यप्रदेश (मंदसौर)

मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण को पूजा जाता है। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और रावण की पत्नी मंदोदरी यहीं की थी यानी यह रावण का ससुराल हुआ। इसलिए यहां के लोग रावण को दामाद की तरह इज्ज़त देते हैं और उसकी पूजा करते हैं।

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कनार्टक (कोलार)

कनार्टक के कोलार जिले में भी रावण को पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि रावण भगवान शिव का भक्त था, यही वजह है कि लोग रावण की पूजा करते हैं। कर्नाटक के मंडया जिले के मालवली नामक स्थान पर रावण का मंदिर भी है जहां महान शिव भक्त के रूप में उसकी पूजा की जाती है।

आंध्रप्रदेश (काकिनाड)

आंध्रप्रदेश के काकिनाड में रावण का मंदिर बना हुआ है। यहां आने वाले लोग भगवान राम की शक्तियों को मानने से इनकार नहीं करते, लेकिन वे रावण को ही शक्ति सम्राट मानते हैं। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है।

हिमाचल प्रदेश (बैजनाथ)

हिमाचल के कांगड़ा जिले के बैजनाथ नामक कस्बे में भी रावण की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इसी जगह पर रावण ने भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था। इसके अलावा यहां के लोगों का यह भी मानना है कि रावण का पुतला जलाने पर उनकी मौत हो सकती है, इस डर से भी यहां रावण दहन नहीं होता है।

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उत्तर प्रदेश (बिसरख)

उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में भी रावण का एक मंदिर बना हुआ है और यहां उसकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि बिसरख गांव रावण का ननिहाल है।

- कंचन सिंह

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