दुनिया भर में फैली है वंशवादी राजनीति, यह सच्चे लोकतंत्र को मजबूत नहीं होने देती

By अजय कुमार | Mar 26, 2019

राजनीति में वंशवाद की बहस पुरानी है और दुनिया के हर देश में यही कहानी है। पुरातन काल से आज तक कुछ अपवादों को छोड़कर राजाओं के पुत्र ही राजा और सम्राटों के पुत्र ही सम्राट हुए हैं। खून का महत्व अधिक रहा है योग्यता से। योग्यता को उत्तराधिकार न मिलने से कई विशाल साम्राज्य ध्वस्त हो गए और इतिहास के पन्नों में खो गए। वंशवाद या परिवारवाद शासन की वह पद्धति है जिसमें एक ही परिवार, वंश या समूह से एक के बाद एक कई शासक बनते जाते हैं। वंशवाद, भाईभतीजावाद का जनक और इसका एक रूप है। ऐसा माना जाता है कि लोकतन्त्र में वंशवाद के लिये कोई स्थान नहीं है किन्तु फिर भी अनेक देशों में अब भी वंशवाद हावी है।

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भारत में वंशवाद की परंपरा उत्तर से लेकर दक्षिण तक सभी क्षेत्रों और पार्टियों में व्याप्त है। वैसे तो नेहरू−गांधी परिवार में पंडित जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने सत्त्ता का सुख उठाया। इसके अलाव बाल ठाकरे द्वारा शिवसेना में परिवारवाद को बढ़ावा देना, लालू यादव, शरद पवार, शेख अब्दुल्ला, फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला परिवार, माधव राव सिंधिया परिवार, मुलायम सिंह यादव, प्रकाश सिंह बादल का अकाली दल, हरियाणा में चौटाला और भजन लाल परिवार, हिमाचल में वीभद्र सिंह का परिवार, दिल्ली में शीला दीक्षित आदि कई परिवार छोटे स्तर पर इसे प्रोत्साहित करते आये हैं।

वंशवाद के नुकसान− वंशवाद के कारण नये लोग राजनीति में नहीं आ पाते। वंशवाद सच्चे लोकतन्त्र को मजबूत नहीं होने देता। अयोग्य शासक देश पर शासन करते हैं जिससे प्रतिभातन्त्र के बजाय मेडियोक्रैसी को बढ़ावा मिलता है। समान अवसर का सिद्धान्त पीछे छूट जाता है। ऐसे कानून एवं नीतियाँ बनायी जाती हैं जो वंशवाद का भरण−पोषण करती रहती हैं। आम जनता में कुंठा की भावना घर करने लगती है। दुष्प्रचार, चमचा तंत्र, धनबल एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है ताकि जनता का ध्यान वंशवाद की कमियों से दूर रखा जा सके।

विदेश में भी वंशवाद− अमेरिका का इतिहास वंशवाद से भरा हुआ है। ज्यादा पीछे न जाकर वर्तमान परिदृश्य में देखते हैं तो जॉर्ज बुश (सीनियर) सन् 1989 से सन् 1993 अमेरिका के राष्ट्रपति रहे। उनका बड़ा बेटा जॉर्ज बुश (जूनियर) सन् 2001 से सन् 2009 तक राष्ट्रपति रहा। वहीं छोटा बेटा जेब बुश फ्लोरिडा प्रान्त का गवर्नर था। अब यही जेब बुश यानि जॉर्ज बुश सीनियर का दूसरा बेटा और जॉर्ज बुश जूनियर का भाई अमेरिका में होने वाले अगले राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल है।

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दूसरी तरफ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन दूसरे दल की ओर से इस दौड़ में शामिल मानी जाती हैं। ऐसा नहीं है कि अमेरिका में प्रतिभाशाली नेताओं की कमी है पर जनता की मानसिकता की वजह से राजनीतिक संगठन मजबूर हैं इन स्थापित राजघरानों से उम्मीदवार चुनने के लिए। तो क्या अमेरिका भी इस वंश परम्परा में उलझ चुका है ? एक सर्वेक्षण के अनुसार चालीस प्रतिशत तक यह सम्भावना होती है कि अमेरिका के सांसद की सीट खाली होने पर उसी के परिवार का कोई सदस्य उसकी जगह लेगा। मतलब साफ है कि अमेरिका जैसे विकसित प्रजातंत्र में भी जनता परिवारवाद के जाल से बाहर निकलने को तैयार नहीं।

इसी तरह की कहानियां हर देश में होती हैं। पिछले माह फिलीपींस में कुछ सांसदों ने राजनीतिक भाई−भतीजावाद और एक ही परिवार के सदस्यों को संसद में चुनकर आने के विरोध में एक विधेयक का मसौदा तैयार किया। इस मसौदे को संसद के पटल पर चर्चा के लिए रखा ही नहीं जा सका, क्योंकि यदि यह विधेयक पास हो जाता तो आधे से ज्यादा सांसद अयोग्य घोषित हो जाते। अब भला अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी कौन मार सकता है और फिर नेता तो बिलकुल नहीं।

-अजय कुमार

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