By अनन्या मिश्रा | Nov 02, 2026
हमारे शरीर का मुख्य कंट्रोल रूम दिमाग होता है। बोलने से लेकर याददाश्त, चलने-फिरने, आंखों की रोशनी और शरीर के बैलेंस तक सब कुछ दिमाग से ही कंट्रोल होता है। जब दिमाग तक ब्लड की सप्लाई अचानक से रुक जाती है या फिर कोई नस फट जाती है। तो कुछ ही मिनटों में ब्रेन सेल्स डैमेज होने लगते हैं। इसको मेडिकल भाषा में 'स्ट्रोक' कहा जाता है। स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।
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स्ट्रोक आने पर मरीज का चेहरा एक ओर लटक सकता है। जिससे मरीज को सही से मुस्कुराने में समस्या होती है। इसके अलावा हाथ-पैर में अचानक से सुन्नपन और कमजोरी हो सकती है। अगर आपको शक है, तो मरीज को मुस्कुराने और अपने दोनों हाथों को उठाने के लिए बोलें। अगर आपको एक हिस्सा कमजोर दिखता है, तो फौरन मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।
बोलते समय सही शब्द न खोज पाना, अचानक जुबान लड़खड़ाना, अजीब से वाक्य बोलना या फिर आसान बातों को भी न समझ पाना एक खतरे की घंटी है। अगर व्यक्ति पूरी तरह से जागा होने के बाद भी बात करने में संघर्ष करता है। तो इन बदलावों को कभी स्ट्रेस, ध्यान भटकने या फिर थकान समझकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति को अचानक से एक चीज दो-दो दिखाई दे, धुंधला दिखने लगे या फिर एक या दोनों आंखों की रोशनी अचानक से चली जाए, तो यह ब्रेन या उसकी ब्लड सप्लाई में आई किसी गंभीर परेशानी का लक्षण हो सकता है।
अचानक तेज उठा सिरदर्द, जो कुछ ही समय में अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाए, तो यह दिमाग के अंदर या आसपास होने वाली ब्लीडिंग का इशारा हो सकता है। इसके अलावा चलने में लड़खड़ाहट, अचानक से चक्कर आना, बिना किसी वजह के गिर पड़ना आदि भी गंभीर न्यूरोलॉजिकल परेशानी के लक्षण होते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को अचानक से ज्यादा कंफ्यूजन हो जाए, या वह अपने आसपास की चीजों का न समझ पाए। या फिर व्यक्ति की एकदम से याददाश्त चली जाए। तो यह भी स्ट्रोक का लक्षण है। दरअसल, यह लक्षण आसानी से पकड़ में नहीं आता है। अगर परिवार को लगता है कि व्यक्ति अपने रोजाना के कामों को ठीक तरह से नहीं कर पा रहा, या फिर अचानक से अजीब व्यवहार कर रहा है, तो बिना किसी देरी के फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बता दें कि स्ट्रोक के जोखिम को पहचानने और फौरन एक्शन लेने के लिए यह फॉर्मूला बेहद काम का है।
F – Face - क्या फेस का एक हिस्सा लटक रहा है।
A – Arms - क्या मरीज का एक हाथ कमजोर पड़ गया है या फिर हाथ उठाने में दिक्कत हो रही है।
S – Speech - क्या बोलते समय आवाज लड़खड़ा रही है या बात को समझने में परेशानी हो रही है।
T – Time - इन लक्षणों के दिखते ही फौरन इमरजेंसी सर्विस को कॉल करें।
भारत में स्ट्रोक का शक होने पर फौरन इमरजेंसी मदद के लिए तुरंत 112 नंबर डायल करें।
साथ ही इस बात का ध्यान दें कि किस समय लक्षण शुरू हुए थे।
लक्षणों के अपने आप से सही होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
अगर एंबुलेंस की सुविधा नहीं है, तो मरीज को खुद की गाड़ी से ले जाएं।
जब तक मेडिकल प्रोफेशनल्स न करें, तब तक खुद से मरीज को कुछ भी खाने-पीने या दवा आदि देने से बचें।
अगर सभी लक्षण कुछ मिनटों में गायब हो जाएं। तब भी हॉस्पिटल जाकर चेकअप जरूर कराना चाहिए। इसको 'ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक' या 'मिनी-स्ट्रोक' कहा जाता है। जोकि फ्यूचर में होने वाले किसी बड़े और जानलेवा स्ट्रोक की चेतावनी हो सकती है।