By रेनू तिवारी | Jan 08, 2026
ब्रह्मांड में पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना एक ऐसी घटना है जिसे हम देख तो नहीं सकते, लेकिन इसके बिना जीवन की कल्पना असंभव है। हर सेकंड, हमारी पृथ्वी एक अविश्वसनीय गति से अपनी धुरी पर घूम रही है। हालांकि हमें इसका एहसास नहीं होता, लेकिन मात्र 24 घंटों में एक चक्कर पूरा करने की यह साधारण सी प्रक्रिया ही हमारे अस्तित्व का आधार है। दिन-रात का चक्र, मौसम के बदलते मिजाज और समय की गणना, यह सब पृथ्वी के इसी घूर्णन (Rotation) का परिणाम है।
पृथ्वी घूर्णन दिवस 2026 हमें इस उल्लेखनीय घटना के पीछे के विज्ञान, इतिहास और इसके गहरे प्रभाव को समझने का अवसर देता है। आइए, इस विशेष दिन पर जानते हैं पृथ्वी के घूमने से जुड़े 8 रोमांचक तथ्य जो हमारी दुनिया को संतुलित रखते हैं:
आमतौर पर हम एक दिन को 24 घंटे का मानते हैं, लेकिन पृथ्वी का वास्तविक घूर्णन थोड़ा अधिक जटिल है। दूर के तारों के सापेक्ष पृथ्वी को एक पूर्ण चक्कर लगाने में लगभग 23 घंटे, 56 मिनट और 4 सेकंड का समय लगता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में 'साइडरियल डे' (Sidereal Day) कहा जाता है।
भले ही हमें महसूस न हो, लेकिन भूमध्य रेखा (Equator) पर पृथ्वी लगभग 1,670 किलोमीटर प्रति घंटा की आश्चर्यजनक गति से घूम रही है। इसका मतलब है कि जब हम चल रहे होते हैं या सो रहे होते हैं, हमारा ग्रह हमारे नीचे अविश्वसनीय वेग से स्पिन कर रहा होता है।
यदि पृथ्वी घूमना बंद कर दे, तो दुनिया का एक हिस्सा हमेशा जलती हुई गर्मी (स्थायी दिन) और दूसरा हिस्सा हाड़ कंपाने वाली ठंड (स्थायी रात) में रहेगा। घूर्णन ही है जो पूरी पृथ्वी पर तापमान का संतुलन बनाए रखता है।
पृथ्वी के घूमने से पैदा होने वाला 'कोरिओलिस प्रभाव' (Coriolis effect) हवाओं और समुद्री धाराओं की गति के पीछे का मूल कारण है। इसी प्रभाव की वजह से उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में तूफान विपरीत दिशाओं में घूमते हैं।
तूफान और चक्रवात: कोरिओलिस प्रभाव ही चक्रवातों को उनका विशिष्ट आकार और दिशा देता है।
समुद्री धाराएं: गल्फ स्ट्रीम जैसी धाराएं, जो पूरी दुनिया में गर्म पानी का परिवहन करती हैं, पृथ्वी के घूर्णन से ही प्रभावित होती हैं।
तापमान का संतुलन: यदि पृथ्वी घूमना बंद कर दे, तो मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा, जिससे दुनिया के कई हिस्से रहने लायक नहीं बचेंगे। मानसून की बारिश से लेकर तटीय पारिस्थितिकी तंत्र तक, सब कुछ पृथ्वी के इसी संतुलित स्पिन पर निर्भर है।
तेजी से घूमने के कारण लगने वाले अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force) की वजह से पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई है। इसे 'ओब्लेट स्फेरोइड' (Oblate Spheroid) कहा जाता है।
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी के घूमने की गति हर 100 साल में लगभग 1.7 मिलीसेकंड धीमी हो जाती है। इसका मतलब है कि करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर दिन आज की तुलना में बहुत छोटे होते थे।
1851 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट ने एक विशाल पेंडुलम (Foucault Pendulum) के जरिए पहली बार दुनिया को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया था कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम रही है।
पृथ्वी का घूर्णन इसके आंतरिक धात्विक कोर को सक्रिय रखता है, जिससे एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) बनता है। यह क्षेत्र हमें सूर्य से आने वाली हानिकारक सौर विकिरणों से बचाता है।
पृथ्वी घूर्णन दिवस केवल विज्ञान का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस नाजुक संतुलन के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है जो जीवन को संभव बनाता है। अगली बार जब आप सूर्यास्त देखें, तो याद रखें कि आप एक विशाल, घूमते हुए अंतरिक्ष यान का हिस्सा हैं जो ब्रह्मांड की यात्रा पर है।