IT Stocks में भूचाल: Profit Booking के दबाव में TCS-Infosys धड़ाम, निवेशकों के लाखों करोड़ डूबे

By Ankit Jaiswal | Jun 03, 2026

शेयर बाजार में बुधवार का कारोबारी सत्र आईटी क्षेत्र के लिए काफी दबाव भरा रहा। बाजार खुलते ही देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलटीएम और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे बड़े नामों में बिकवाली हावी रही, जिसके चलते निफ्टी आईटी सूचकांक में करीब 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

गौरतलब है कि मंगलवार को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी। उस समय वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर सकारात्मक माहौल ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था। अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों की मजबूती का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया था। हालांकि अगले ही कारोबारी दिन निवेशकों ने अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी।

विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी आईटी क्षेत्र पर दबाव बना रही है। बताया जा रहा है कि मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 8,362 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की। चूंकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बड़ी आईटी कंपनियों में काफी अधिक होती है, इसलिए उनकी बिकवाली का सीधा असर इन शेयरों पर दिखाई देता है।

अगर प्रमुख शेयरों की बात करें तो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। कंपनी का शेयर 8 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 2,246 रुपये के आसपास पहुंच गया। वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर करीब 30 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है।

इंफोसिस के शेयरों में भी लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का शेयर 1,227 रुपये के स्तर तक फिसल गया। वहीं टेक महिंद्रा के शेयर करीब 5 प्रतिशत टूटकर 1,492 रुपये के आसपास कारोबार करते दिखाई दिए हैं।

इसके अलावा एलटीएम के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई। यह गिरावट दर्शाती है कि पूरे आईटी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े बड़े सौदे मौजूद हैं। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी इन कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि उनकी बड़ी आय विदेशी ग्राहकों से डॉलर में आती है।

बता दें कि कमजोर रुपया निर्यात आधारित कंपनियों के लाभ को बढ़ाने में मदद करता है। यही कारण है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद कई विश्लेषक आईटी क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को सकारात्मक मान रहे हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, विदेशी निवेश प्रवाह और आईटी कंपनियों के आगामी व्यावसायिक सौदों पर बनी हुई है।

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