Global Health Emergency!! अफ्रीका में 'इबोला' का घातक प्रकोप, संकट के बीच भारत ने कांगो भेजी आपातकालीन चिकित्सा सामग्री की बड़ी खेप

By रेनू तिवारी | May 28, 2026

मध्य अफ्रीका में जानलेवा इबोला (इबोला) वायरस का प्रकोप तेजी से पैर पसार रहा है। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट से निपटने और इंसानी जिंदगियों को बचाने के लिए भारत ने एक बार फिर 'वैश्विक मित्र' की भूमिका निभाई डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) को आपातकालीन चिकित्सा दवाओं और उपकरणों की एक बड़ी खेप दिखाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद भारत की यह त्वरित सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Africa CDC के अनुसार, इस सहायता पैकेज में ज़रूरी जांच उपकरण, इलाज की दवाएं, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए ज़रूरी सामान, और मरीज़ों के इलाज के लिए ज़रूरी सामग्री शामिल है।

एजेंसी ने इस खेप के पहुंचने का सार्वजनिक रूप से स्वागत करते हुए कहा, "Africa CDC भारत सरकार और भारत की जनता द्वारा उदारतापूर्वक दान की गई आपातकालीन चिकित्सा सामग्री के आगमन का स्वागत करता है। यह सामग्री DR कांगो में बुंडीबुग्यो इबोला के प्रकोप से निपटने के चल रहे प्रयासों में मदद करेगी।" एजेंसी ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत "पूरे महाद्वीप में लोगों की जान बचाने और स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अपना समर्थन और प्रतिबद्धता दिखा रहा है।"

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बुंडीबुग्यो स्ट्रेन और बढ़ती चिंताएं

बुंडीबुग्यो वेरिएंट, जो इबोला वायरस की छह ज्ञात प्रजातियों में से एक है, ने 2007 में युगांडा में पहली बार पहचाने जाने के बाद से अफ्रीका में कई बार प्रकोप फैलाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि इस खास स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई भी स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। इबोला संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में अक्सर बुखार, गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के अंदर या बाहर रक्तस्राव शामिल होते हैं।

इंसानों में संक्रमण तब फैलना शुरू हो सकता है, जब वे संक्रमित जंगली जानवरों—जैसे फल खाने वाले चमगादड़, गोरिल्ला, चिंपांज़ी, जंगली हिरण या बंदर—के खून या शारीरिक स्रावों के संपर्क में आते हैं। ये जानवर अक्सर वर्षावनों वाले इलाकों में मृत या बीमार पाए जाते हैं।


क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का बढ़ता खतरा

भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब उसने अफ्रीका के साथ अपने स्वास्थ्य सहयोग को और मज़बूत किया है। यह सहयोग विशेष रूप से COVID-19 महामारी जैसे बड़े स्वास्थ्य संकटों के दौरान दवाइयों और टीकों के रूप में सहायता प्रदान करने पर केंद्रित रहा है। WHO ने हाल ही में कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (Public Health Emergency of International Concern) घोषित किया है।

अब तक 1,000 से अधिक संदिग्ध संक्रमणों और कम से कम 220 मौतों की सूचना मिली है, जिनमें से युगांडा में सात मामलों की पुष्टि हुई है। WHO और मानवीय सहायता समूह, दोनों ने ही चेतावनी दी है कि इबोला का वास्तविक प्रसार मौजूदा आंकड़ों से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।

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