By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 16, 2020
नयी दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास में लगे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार अभी पूरी गति में नहीं पहुंच पाया है।ऐसे में केंद्रीय बैंक वृद्धि को समर्थन देने के लिएजरूरत पड़ने पर कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार द्वारा जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े कोविड-19 के अर्थव्यवस्था पर पड़े असर को दर्शाते हैं। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए सरकार ने मार्च के अंत में देशव्यापी सख्त लॉकडाउन लागू किया था, जिसके चलते अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था का आकार 23.9 प्रतिशत घट गया। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, कृषि गतिविधियों के संकेतक, विनिर्माण के लिए पीएमआई और बेरोजगारी पर कुछ निजी अनुमान चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में स्थिरीकरण आने की ओर इशारा कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में भी संकुचन कम हो रहा है।’’
पिछले एक दशक में यह पहला मौका है जब उधारी लागत इतनी कम हुई है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नकदी की उपलब्धता से सरकार की उधारी लागत बेहद कम बनी हुई है और इस समय बॉन्ड प्रतिफल पिछले 10 वर्षों के निचले स्तर पर हैं। रिजर्व बैंक गवर्नर ने कोविड- 19 के बाद अर्थव्यवस्था की गति तेज करने के लिये निजी क्षेत्र को मानव संसाधन एवं शिक्षा, निर्यात, अनुसंधान एवं नवोन्मेष, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये कहा है। उन्होंने कहा है कि पर्यटन क्षेत्र में व्यापक संभावनायें हैं और निजी क्षेत्र को इसका लाभ उठाना चाहिये। उन्होंने कहा, ‘‘हम बेहद सावधानी से बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। जरूरत होने पर और उपाय किए जाएंगे। मैंने पहले भी अपने बयानों में कहा था कि आरबीआई पूरी तरह से तैयार है... मैंने कहा था कि आरबीआई लड़ाई के लिए तैयार है और जो भी उपाय जरूरी होंगे, आरबीआई उन्हें उठाएगा।’’ उन्होंने कहा कि ऋण पुनर्गठन योजना को तैयार करते समय जमाकर्ताओं के हितों और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखा गया है।