ED vs Mamata Banerjee: अब हाई कोर्ट में होगी सियासी जंग, तृणमूल कांग्रेस ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

By Ankit Jaiswal | Jan 09, 2026

गुरुवार को कोलकाता में जो घटनाक्रम हुआ, उसने इसे सियासी और कानूनी दोनों लिहाज़ से बड़ा विवाद बना दिया है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामला सौंपने की मांग की है। यह याचिका उस घटनाक्रम के बाद दाखिल की गई है, जब ईडी की टीम राजनीतिक सलाहकार संस्था इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (आई-पैक) के दफ्तर और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी कर रही थी और उसी दौरान मुख्यमंत्री वहां पहुंच गईं।


गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई आज दोपहर 2:30 बजे कलकत्ता हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सुव्रत घोष के समक्ष प्रस्तावित है। इसी के साथ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी एक अलग याचिका दाखिल की गई है, जिसमें आई-पैक से जुड़े परिसरों से कथित तौर पर पार्टी से संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। मौजूद जानकारी के अनुसार, आई-पैक 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है।


ईडी का कहना है कि यह तलाशी 2020 में दर्ज एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी जांच का हिस्सा थी, जो कारोबारी अनूप माजी के खिलाफ चल रही है। एजेंसी के अनुसार, माजी कथित तौर पर कोयला तस्करी के एक नेटवर्क का संचालन कर रहा था, जिसमें ईस्टर्न कोलफील्ड्स के लीज क्षेत्रों से अवैध खनन कर कोयला विभिन्न फैक्ट्रियों में बेचा जाता था। ईडी का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े हवाला ऑपरेटरों के जरिए करोड़ों रुपये की लेनदेन आई-पैक तक पहुंची।


एजेंसी ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के पहुंचने से जांच में बाधा उत्पन्न हुई और कुछ दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य वहां से हटा लिए गए। ईडी का यह भी कहना है कि उसके अधिकारियों को कथित तौर पर रोका गया, उन्हें बाहर निकलने से भी रोका गया और वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में हस्तक्षेप किया गया। इसी आधार पर ईडी ने कोर्ट से आग्रह किया है कि ममता बनर्जी, राज्य पुलिस के अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के लिए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।


वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया है और आशंका जताई है कि पार्टी से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जांच एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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